Dario Amodei: जिसने OpenAI का ऑफर ठुकराया और 'Anthropic' को बनाया दुनिया की सबसे सुरक्षित AI कंपनी

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India News Live,Digital Desk : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में जहाँ एक तरफ मुनाफे और रफ्तार की होड़ मची है, वहीं डारियो अमोदेई (Dario Amodei) एक ऐसे नायक बनकर उभरे हैं जिन्होंने 'सुरक्षा और नैतिकता' को सबसे ऊपर रखा। एंथ्रोपिक (Anthropic) के सीईओ डारियो ने न केवल ओपनएआई (OpenAI) के साथ विलय का बड़ा प्रस्ताव ठुकराया, बल्कि दुनिया को दिखाया कि एआई का विकास जिम्मेदारी के साथ कैसे किया जा सकता है।

नैतिकता के लिए छोड़ा OpenAI और ठुकराया CEO का पद

डारियो अमोदेई कभी ओपनएआई में रिसर्च के उपाध्यक्ष थे और उन्होंने GPT-2 और GPT-3 के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन जब उन्हें लगा कि कंपनी सुरक्षा मानकों से समझौता कर व्यावसायिक लाभ की ओर बढ़ रही है, तो उन्होंने 2021 में इस्तीफा दे दिया।

बड़ा फैसला: 2023 में जब सैम ऑल्टमैन को ओपनएआई से हटाया गया था, तब बोर्ड ने डारियो को कंपनी मर्ज करने और नई इकाई का सीईओ बनने का प्रस्ताव दिया।

इनकार: एआई की दिशा और नैतिकता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने हजारों करोड़ों का यह ऑफर ठुकरा दिया।

सादा जीवन और 'हर्ट्ज थीसिस प्राइज' विजेता वैज्ञानिक

करीब 58,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद डारियो की जीवनशैली बेहद साधारण है।

सादगी: वे अक्सर सामान्य स्वेटर और जैकेट में नजर आते हैं और हाई-प्रोफाइल पार्टियों से दूर रहते हैं।

शिक्षा: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से बायोफिजिक्स में पीएचडी करने वाले डारियो बचपन से ही गणित और फिजिक्स के जादूगर रहे हैं। 2011 में उन्हें प्रतिष्ठित 'हर्ट्ज थीसिस प्राइज' से नवाजा गया था।

परिवार: उनकी बहन डेनिएला अमोदेई एंथ्रोपिक की सह-संस्थापक और प्रेसिडेंट हैं, जो कंपनी के प्रबंधन में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।

Anthropic: 'पब्लिक बेनिफिट कॉर्पोरेशन' का मिशन

डारियो ने एंथ्रोपिक को एक 'पब्लिक बेनिफिट कॉर्पोरेशन' के रूप में स्थापित किया। इसका सीधा मतलब है कि इस कंपनी के लिए मुनाफे से ज्यादा समाज का हित सर्वोपरि है।

Claude AI: उनकी कंपनी का 'क्लाउड' (Claude) एआई मॉडल आज चैटजीपीटी का सबसे सुरक्षित और सटीक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।

सुरक्षा तकनीक: डारियो ने ही RLHF (Reinforcement Learning from Human Feedback) जैसी तकनीक को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई, जो एआई को इंसानी मूल्यों के अनुसार व्यवहार करना सिखाती है।

2030 का डर और संपत्ति का दान

डारियो का मानना है कि 2030 तक एआई इंसानी बुद्धिमत्ता के बराबर या उससे आगे निकल सकता है। इस 'सुपर-इंटेलिजेंस' के खतरों को भांपते हुए वे लगातार वैश्विक स्तर पर सख्त एआई कानूनों की वकालत करते हैं। अपनी इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी 80% संपत्ति दान करने की घोषणा की है।

टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है, जो यह साबित करता है कि आज की टेक दुनिया को डारियो जैसे 'एथिकल लीडर्स' की सख्त जरूरत है।