From friend to foe: पाकिस्तान और तालिबान के बीच 'खुली जंग' के आसार; क्यों लहूलुहान हो रही है डूरंड लाइन
India News Live,Digital Desk : कभी जिस तालिबान को पाकिस्तान ने अपनी 'रणनीतिक गहराई' (Strategic Depth) माना था, आज वही उसके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। शुक्रवार (27 फरवरी 2026) को पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव उस चरम पर पहुंच गया, जिसे पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने 'खुली जंग' करार दिया है। सीमा पर हो रहे हवाई हमलों और जमीनी झड़पों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमले: क्या है ताजा स्थिति?
पाकिस्तान ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसके लड़ाकू विमानों ने रात के अंधेरे में अफगानिस्तान के भीतर घुसकर कई बड़े शहरों में हवाई हमले किए।
निशाना: तालिबान के सैन्य ठिकाने, मुख्यालय और हथियार डिपो।
वजह: पाकिस्तान का दावा है कि यह कार्रवाई सीमा पर अफगान बलों द्वारा की गई गोलाबारी के जवाब में की गई है।
नुकसान: दोनों देशों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है।
'गुलामी की जंजीरें' तोड़ने से 'खुली जंग' तक का सफर
2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था, तब तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने खुशी जताते हुए कहा था कि "अफगानों ने गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं"। लेकिन यह खुशी अल्पकालिक साबित हुई।
TTP का मुद्दा: पाकिस्तान का मुख्य आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकी अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाहगाहों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आतंकी हमले: इस्लामाबाद के अनुसार, 2024 के अंत से अब तक हुए 7 बड़े आत्मघाती हमलों के तार अफगानिस्तान से जुड़े हैं। पिछले हफ्ते बाजौर में हुए हमले में 11 सैनिकों की मौत ने आग में घी डालने का काम किया।
कौन है TTP और क्यों है विवाद?
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को 'पाकिस्तानी तालिबान' भी कहा जाता है। 2007 में गठित यह संगठन पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना चाहता है।
वैचारिक जुड़ाव: TTP और अफगान तालिबान की विचारधारा एक ही है। यही वजह है कि अफगान तालिबान अपने 'भाइयों' (TTP) के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराता रहा है।
बलूच विद्रोहियों का साथ: पाकिस्तान का यह भी आरोप है कि अफगानिस्तान में बलूच अलगाववादियों को भी समर्थन मिल रहा है, जो बलूचिस्तान में चीनी प्रोजेक्ट्स और पाक सेना को निशाना बना रहे हैं।
काबुल का पलटवार: पाकिस्तान पर भी गंभीर आरोप
अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। काबुल का कहना है कि:
वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने देता।
पाकिस्तान खुद इस्लामिक स्टेट (ISIS) के लड़ाकों को पनाह दे रहा है ताकि अफगानिस्तान को अस्थिर किया जा सके।
मध्यस्थता भी रही विफल
हाल के महीनों में तुर्किये, कतर और सऊदी अरब ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की कोशिश की थी। एक नाजुक युद्धविराम भी हुआ था, लेकिन वह चंद दिनों में ही टूट गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव ऐसे ही बना रहा, तो पाकिस्तान अपनी सैन्य कार्रवाई (Full-scale Military Operation) और तेज कर सकता है, जिसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा।