Crude Oil Crisis: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच तेल की कीमतों में 9% का उछाल, लेकिन भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें क्या है सरकार का 'बंपर प्लान'
India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। युद्ध की विभीषिका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 9 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस उछाल ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का डर पैदा कर दिया है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वैश्विक तनाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।
क्यों नहीं बढ़ेंगे दाम? सरकार का 'मार्जिन फॉर्मूला' आया काम
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में 9% का उछाल भारत के लिए चिंता का विषय होना चाहिए था, लेकिन सरकार की संतुलित नीति ने इस खतरे को टाल दिया है।
बैलेंसिंग एक्ट: तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने पर अपना मार्जिन (मुनाफा) बढ़ा लेती हैं और जब कीमतें बढ़ती हैं, तो उस मुनाफे का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को महंगे तेल की मार से बचाने के लिए 'बफर' के तौर पर करती हैं।
स्थिर कीमतें: देश की तीनों प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को काफी हद तक स्थिर रखा है।
कच्चे तेल में लगी आग, लेकिन भारतीय बाजार 'कूल'
ईरान पर हुए हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। हालांकि, भारत सरकार के पास पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और तेल कंपनियों का मजबूत वित्तीय ढांचा है, जो कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद कर रहा है।
मध्यम वर्ग को बड़ी राहत
रिटेल ईंधन की कीमतें स्थिर रहने का सीधा मतलब है कि माल ढुलाई (Logistics) और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में अचानक कोई बड़ा उछाल नहीं आएगा। सरकार की इस 'प्रो-कंज्यूमर' नीति से मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने राहत की सांस ली है। सूत्रों का कहना है कि सरकार निकट भविष्य में कीमतों में किसी भी तरह की वृद्धि को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं है।