'मिर्जापुर द मूवी' पर गहराया विवाद: 'शूरवीर' गीत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दाखिल
बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' अब एक बड़े कानूनी और वैचारिक बवंडर में घिर गई है। फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर में इस्तेमाल किए गए लोकप्रिय राजस्थानी गीत 'शूरवीर' (Shoorveer) को लेकर शुरू हुआ विरोध अब सड़कों और राजनीतिक बयानों से निकलकर देश की अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। इस विवाद को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि फिल्म से इस गाने को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और इसके अनधिकृत व अपमानजनक उपयोग पर रोक लगाई जाए। इस कदम के बाद फिल्म के निर्माताओं, एक्सेल एंटरटेनमेंट और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका: इतिहास और राष्ट्रीय महापुरुषों के अपमान का आरोप
दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि 'शूरवीर' कोई साधारण फिल्मी या पॉप गीत नहीं है, बल्कि यह गीत मेवाड़ के अमर स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रनायक महाराणा प्रताप के अद्वितीय शौर्य, स्वाभिमान, हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध और उनके स्वामीभक्त घोड़े चेतक के बलिदान को नमन करने के लिए रचा गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म निर्माताओं ने व्यावसायिक मुनाफे और सनसनी फैलाने के उद्देश्य से इस गौरवमयी गीत को मुन्ना त्रिपाठी, गुड्डू पंडित जैसे काल्पनिक माफिया, गैंगस्टर और हिंसक अपराधियों के दृश्यों के पीछे बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर बजाया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कृत्य भारत के गौरवशाली इतिहास को विकृत करने, युवाओं को भ्रमित करने और जनभावनाओं को जानबूझकर आहत करने जैसा है। अदालत से आग्रह किया गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में ऐतिहासिक प्रतीकों और राष्ट्रीय नायकों का अपराधीकरण बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
CBFC और सूचना-प्रसारण मंत्रालय को पार्टी बनाने की मांग
दाखिल याचिका में केवल फिल्म के निर्माताओं को ही कटघरे में नहीं खड़ा किया गया, बल्कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि CBFC को निर्देश दिया जाए कि वह फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन के प्रमाण पत्र की समीक्षा करे और जब तक फिल्म के थिएटर व ओटीटी प्रिंट्स से इस विवादित ऑडियो ट्रैक को पूरी तरह म्यूट या डिलीट न कर दिया जाए, तब तक संबंधित हिस्से के प्रसारण पर अंतरिम रोक लगाई जाए। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर घूम रहे इस गाने के प्रोमो वीडियोज को भी हटाने के निर्देश देने की अपील की गई है।
राजस्थान से लेकर दिल्ली तक सुलग रहा विवाद: राजनेताओं और मूल गायक का कड़ा विरोध
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में मामला पहुंचने से पहले ही इस गाने को लेकर राजस्थान में भारी आक्रोश देखा जा रहा था। राजस्थान के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ समेत कई जनप्रतिनिधियों ने सेंसर बोर्ड को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, इस गीत के मूल रचनाकार और राजस्थानी लोक गायक व रैपर रैपेरिया बालम (अशोक मांडा बिश्नोई) ने भी मेकर्स पर बौद्धिक संपदा अधिकार और कॉपीराइट उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं। गायक का आरोप है कि मेकर्स ने उनसे कोई वैध अनुमति लिए बिना ही इस देशभक्ति गीत को एक गैंगस्टर ड्रामा में इस्तेमाल कर लिया, जो कला और संस्कृति का खुला अनादर है।
फिल्म के कारोबार और मेकर्स की प्रतिक्रिया पर टिकी नजरें
पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा की मुख्य भूमिकाओं वाली 'मिर्जापुर: द मूवी' सिनेमाघरों में जबरदस्त बिजनेस कर रही है, लेकिन लगातार गहराते इस विवाद ने मेकर्स की पेशानी पर बल ला दिए हैं। अब सबकी नजरें दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली प्रारंभिक सुनवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए कोई कड़ा अंतरिम निर्देश जारी करती है, तो निर्माताओं को फिल्म के प्रिंट्स में तत्काल फेरबदल करने पड़ सकते हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में फिल्म के डिजिटल और सैटेलाइट रिलीज पर भी पड़ सकता है।