Congress vs Modi Govt: 'विश्वगुरु' की कूटनीति पर कांग्रेस का हमला, पूछा- पहलगाम हमले के बाद भी PAK 'मध्यस्थ' कैसे बना
India News Live,Digital Desk : इस्लामाबाद में शुरू हुई अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता ने भारत में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस का मुख्य सवाल यह है कि जिस पाकिस्तान को भारत ने वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने का दावा किया था, वह आज अमेरिका और ईरान जैसे देशों के बीच 'शांतिदूत' की भूमिका कैसे निभा रहा है?
'पहलगाम हमला और पाकिस्तान की नई भूमिका'
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह समझना बेहद मुश्किल है कि अप्रैल 2025 के कायराना पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका स्पष्ट थी, वह आज मध्यस्थ की भूमिका में कैसे आ गया? भारत द्वारा उसे अलग-थलग करने के लिए किए गए तमाम कूटनीतिक प्रयास आखिर कहां गए?"
'हग्लमसी' (Hugplomacy) पर कटाक्ष
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति शैली पर तंज कसते हुए इसे 'स्वयं-घोषित विश्वगुरु की हग्लमसी' (गले मिलने वाली कूटनीति) करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि:
'नमस्ते ट्रंप', 'हाउडी मोदी' और 'अबकी बार ट्रंप सरकार' जैसे नारों के बाद भी अमेरिका ने भारत की भावनाओं को दरकिनार कर पाकिस्तान को यह अहमियत क्यों दी?
क्या यह मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता नहीं है कि पाकिस्तान की साख वैश्विक मंच पर फिर से बढ़ रही है?
डॉ. मनमोहन सिंह सरकार का दिया हवाला
कांग्रेस ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने बिना किसी शोर-शराबे के पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी। पार्टी के अनुसार, वर्तमान सरकार केवल दावों में 'विश्वगुरु' बनी हुई है, जबकि जमीनी हकीकत में पाकिस्तान की कूटनीतिक साख मजबूत हो रही है, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक है।
सलमान खुर्शीद ने भी घेरा
पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इस नई भूमिका से उसकी कूटनीतिक साख बढ़ी है, जो सीधे तौर पर भारत की कूटनीतिक विफलता को दर्शाती है। कांग्रेस का मानना है कि पश्चिम एशिया में शांति भारत के लिए जरूरी है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान का मंच बनना भारत की विदेश नीति की हार है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि आज (11 अप्रैल 2026) इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हो रही है। इस वार्ता का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव को कम करना और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करना है। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया की मेजबानी कर रहा है, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में फिर से केंद्र में आने का मौका मिल गया है।