'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तारी का डर, बोले- 'दिल्ली आते ही तिहाड़ ले जाएगी पुलिस'
India News Live,Digital Desk : सीजेआई की टिप्पणी के बाद रातों-रात सोशल मीडिया का 'सेंसेशन' बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। आलम यह है कि इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स के मामले में इसने भाजपा जैसी स्थापित पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, इस 'डिजिटल पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
"दिल्ली पहुंचते ही तिहाड़ ले जाएगी पुलिस"
एक इंटरव्यू में अभिजीत दिपके ने आशंका जताई है कि उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जैसे ही मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरूंगा, दिल्ली पुलिस का एक काफिला मुझे सीधे तिहाड़ जेल ले जाएगा।" 30 वर्षीय अभिजीत, जो अभी अमेरिका में हैं, का मानना है कि सत्ता प्रतिष्ठान उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों और तेजी से बढ़ती डिजिटल लोकप्रियता से घबरा गया है।
फॉलोअर्स की बढ़ती संख्या बनाम जमीनी मुद्दे
भाजपा को सोशल मीडिया पर पछाड़ने के सवाल पर अभिजीत ने बेहद व्यावहारिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात की खुशी नहीं है कि हमारे फॉलोअर्स ज्यादा हैं। आखिर इससे होगा क्या? जनता के मूल मुद्दे तो वहीं के वहीं हैं।"
डिजिटल सेंसेशन: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के 'एक्स' अकाउंट पर पाबंदी लगने के बावजूद, उनके नए हैंडल 'कॉकरोच इज बैक' ने कुछ ही घंटों में हजारों की संख्या में फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं।
अभिजीत का बैकग्राउंड: अभिजीत दिपके एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं। वे पुणे से पत्रकारिता में स्नातक और बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में परास्नातक हैं। भारत आने से पहले वे डिजिटल पॉलिटिकल मैसेजिंग और ऑनलाइन कैंपेन स्ट्रेटेजी में काम कर चुके हैं।
सरकार का दांव क्या उलटा पड़ गया?
अभिजीत का मानना है कि उनके अकाउंट को 'सेंसर' करने की कोशिश सरकार के लिए ही उल्टा दांव साबित हुई है। उनका तर्क है कि बार-बार अकाउंट ब्लॉक करने और हैक करने की कोशिशों से लोगों में इस पार्टी के प्रति जिज्ञासा और समर्थन और अधिक बढ़ रहा है। वे कहते हैं, "इस बात की उम्मीद पहले से थी, लेकिन सरकार का यह दांव उन्हीं पर भारी पड़ रहा है।"
क्या यह केवल 'डिजिटल विरोध' है?
यह पार्टी अभी चुनाव आयोग में पंजीकृत नहीं है, लेकिन इसके घोषणापत्र और तीखे व्यंग्यों ने युवाओं के एक बड़े वर्ग को आकर्षित किया है। बेरोजगारी, पेपर लीक और राजनीतिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर 'कॉकरोच' के नाम से कटाक्ष करना, युवाओं को अपनी भाषा में अपना दर्द महसूस करने जैसा लग रहा है।
अभिजीत दिपके का यह डर कि उन्हें दिल्ली उतरते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा, उनके डिजिटल आंदोलन को एक 'राजनीतिक विद्रोही' की छवि दे रहा है, जो आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा बटोर सकता है।