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September 09 2026 04:54 am

पेरिस एफिल टावर विवाद में कूदे कॉकरोच और अभिजीत दीपके: 'धर्म के ठेकेदार न बनें पिछड़ी सोच वाले पुरुष'

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फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर के सामने भारतीय महिलाओं के पारंपरिक परिधान पहनने और भारतीय संस्कृति के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया वैचारिक विवाद छिड़ गया है। हाल ही में कुछ भारतीय पर्यटकों और कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा एफिल टावर के बैकड्रॉप में पारंपरिक साड़ी पहनकर फोटो और रील्स शेयर किए जाने के बाद इंटरनेट यूजर्स दो गुटों में बंट गए।

एक वर्ग जहां इसे विदेश में भारतीय संस्कृति के गर्व से प्रदर्शन के रूप में देख रहा था, वहीं इंटरनेट ट्रोलर्स के एक धड़े ने इसे 'अनुचित' और 'स्थान के अनुकूल न होना' बताते हुए महिलाओं को निशाने पर ले लिया। अब इस पूरे विवाद में सोशल मीडिया पर सक्रिय डिजिटल क्रिएटर्स, जिनमें कॉकरोच (Cockroach) और अभिजीत दीपके जैसे नाम शामिल हैं, खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने महिलाओं के कपड़ों पर ज्ञान देने वाले संकीर्ण मानसिकता के लोगों की जमकर क्लास लगाई है।

'धर्म के ठेकेदार न बनें पिछड़ी सोच वाले पुरुष': अभिजीत दीपके का तीखा प्रहार

सोशल मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर मुखर रहने वाले अभिजीत दीपके ने महिलाओं को ट्रोल करने वालों को सीधे आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित संस्कारी और पिछड़ी सोच रखने वाले पुरुष हमेशा से महिलाओं की पसंद और उनकी व्यक्तिगत आजादी को नियंत्रित करने की कोशिश करते रहे हैं।

अभिजीत दीपके ने कहा:

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन: एक महिला क्या पहनेगी, वह दुनिया के किस कोने में क्या पहनकर घूमेगी, यह पूरी तरह उसका निजी फैसला है। किसी भी पुरुष या स्वयंभू समाज सुधारक को इस पर फतवा जारी करने का कोई हक नहीं है।

संस्कृति के दोहरे मापदंड: जब कोई भारतीय पुरुष विदेश में सूट-बूट या आधुनिक कपड़े पहनता है, तो किसी को आपत्ति नहीं होती, लेकिन जब महिलाएं अपनी पसंद से साड़ी पहनती हैं या कोई अन्य परिधान चुनती हैं, तो अचानक संस्कृति की दुहाई देकर उन्हें नीचा दिखाया जाने लगता है।

नैतिक पुलिसिंग पर रोक जरूरी: समाज को यह समझना होगा कि संस्कृति किसी बंद बक्से में कैद नहीं है। महिलाओं के पहनावे पर टिप्पणी करने से पहले पुरुषों को अपनी मानसिकता में आधुनिकता और सम्मान की भावना लानी चाहिए।

इन्फ्लुएंसर 'कॉकरोच' ने ट्रोलर्स के दोहरेपन पर साधा निशाना

इस विवाद में डिजिटल क्रिएटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर 'कॉकरोच' ने भी व्यंग्यात्मक और तीखे अंदाज में ट्रोलर्स पर पलटवार किया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चलने वाली जहरीली ट्रोलिंग को उजागर करते हुए कहा कि विदेश जाने पर भारतीय अपनी जड़ों को साथ लेकर चल रहे हैं, तो इसमें शर्म महसूस करने के बजाय गर्व होना चाहिए। एफिल टावर हो, टाइम्स स्क्वायर हो या लंदन ब्रिज, दुनिया का हर कोना अब वैश्विक हो चुका है। वहां भारतीय संस्कृति, कला और परिधानों का दिखना भारत की बढ़ती वैश्विक 'सॉफ्ट पावर' का प्रतीक है, न कि किसी उपहास का विषय।

क्यों भड़का था विवाद? इंटरनेट पर क्यों भिड़े यूजर्स?

इस पूरे विवाद की जड़ में वह रूढ़िवादी सोच थी, जिसने पश्चिमी स्मारकों के सामने भारतीय महिलाओं के पारंपरिक परिधानों में आने पर आपत्ति जताई थी:

ट्रोलर्स का दावा: सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना था कि जब आप विदेश जाते हैं, तो आपको वहां के माहौल और संस्कृति के अनुसार आधुनिक या कैजुअल कपड़े पहनने चाहिए। उनका आरोप था कि कुछ लोग केवल व्यूज और लाइक्स हासिल करने के लिए विदेशी स्मारकों पर पारंपरिक वेशभूषा का 'प्रदर्शन' करते हैं।

सपोर्टर्स का तर्क: वहीं दूसरी ओर भारी संख्या में नेटिजन्स ने महिलाओं का बचाव करते हुए कहा कि साड़ी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी पहचान और लालित्य (Elegance) का प्रतीक है। जब विदेशी भारत आकर पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनते हैं तो उनकी सराहना होती है, फिर भारतीय नागरिक गर्व से पेरिस में अपनी पहचान क्यों नहीं प्रदर्शित कर सकते?

आधुनिकता बनाम संकीर्ण सोच: समाज के सामने बड़ा सवाल

इस बहस ने एक बार फिर डिजिटल स्पेस में महिलाओं की सुरक्षा, उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज में मौजूद संकीर्ण पितृसत्तात्मक सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को उनके कपड़ों, लाइफस्टाइल या तस्वीरों के आधार पर जज करना एक सामान्य चलन बन चुका है। ऐसे में अभिजीत दीपके और अन्य क्रिएटर्स द्वारा इस तरह की मोरल पुलिसिंग के खिलाफ बेबाकी से खड़े होना उन हजारों महिलाओं को आवाज देता है जो बिना किसी अपराध के ऑनलाइन नफरत का शिकार बनती हैं।