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September 09 2026 01:07 am

TMC सांसद नदीमुल हक के उर्दू अखबार में 60 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी: 24 घंटे से ज्यादा चली ED की मैराथन छापेमारी

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पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक और वरिष्ठ नेता पर केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) का बड़ा एक्शन सामने आया है। टीएमसी से राज्यसभा सांसद नदीमुल हक से जुड़े बहु-संस्करण उर्दू दैनिक 'अखबार-ए-मशरिक' (Akhbar-e-Mashriq) के विभिन्न ठिकानों पर ईडी ने 24 घंटे से अधिक समय तक सघन तलाशी अभियान चलाया।

सोमवार 7 सितंबर की सुबह शुरू हुई यह मैराथन छापेमारी मंगलवार सुबह समाप्त हुई। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस लंबी कार्रवाई के दौरान अखबार के खातों और संबंधित संस्थाओं के बहीखातों में करीब 60 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताएं और संदिग्ध लेन-देन पकड़े गए हैं। इन संदिग्ध लेन-देन के समर्थन में मौके पर कोई वैध और संतोषजनक दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिला।

कोलकाता, दिल्ली और रांची में 7 ठिकानों पर एक साथ दबिश

ईडी की टीमों ने इस कार्रवाई के तहत पश्चिम बंगाल के अलावा दिल्ली और झारखंड की राजधानी रांची में कुल सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की:

पार्क सर्कस स्थित मुख्य कार्यालय: केंद्रीय कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में स्थित 'अखबार-ए-मशरिक' के मुख्य दफ्तर पर अधिकारियों ने विस्तृत छानबीन की।

आवास और दामाद का ठिकाना: दक्षिण कोलकाता के दरगाह रोड स्थित सांसद नदीमुल हक के निजी आवास और उनके दामाद से जुड़े ठिकानों पर भी जांच टीमें पहुंचीं।

रांची और दिल्ली के दफ्तर: रांची के कोकर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय और दिल्ली परिसरों में भी समानांतर तलाशी ली गई।

सांसद से पूछताछ: कार्रवाई की शुरुआत के समय सांसद नदीमुल हक रांची में मौजूद थे। उन्हें सोमवार रात कोलकाता लाया गया, जहां उनके आवास और दफ्तर में दस्तावेजों के सामने बैठाकर लंबी पूछताछ की गई।

24 घंटे चली छापेमारी में क्या-क्या मिला?

ईडी के अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं:

बैंक खातों और डिजिटल दस्तावेजों की जांच: जांचकर्ताओं ने कई बैंक खातों के स्टेटमेंट, लोन पेपर्स, बैलेंस शीट और हार्ड डिस्क/लैपटॉप से मिले डेटा को जब्त किया है।

60 करोड़ के बेहिसाब लेन-देन: खातों की शुरुआती पड़ताल में लगभग 60 करोड़ रुपये का ऐसा फंड फ्लो दिखा है जिसका कोई स्पष्ट कारोबारी औचित्य नहीं दर्शाया गया था। जब सांसद से इसके स्रोत के बारे में पूछा गया, तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।

हवाला चैनल का संदेह: जांच एजेंसी को अंदेशा है कि मीडिया हाउस के जरिए धन को इधर-उधर करने के लिए अनौपचारिक वित्तीय रास्तों यानी 'हवाला' नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

पार्टी फंड के दुरुपयोग की पड़ताल: प्राथमिक शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया था कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ फंड्स को मीडिया संस्था के जरिए खपाने की कोशिश की जा रही थी, जिसकी भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

बिधाननगर पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच

ईडी की इस बड़ी कार्रवाई की नींव बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में दर्ज एक मूल एफआईआर (FIR) से पड़ी थी। इस शिकायत में अवैध और बेहिसाब वित्तीय लेन-देन तथा अज्ञात स्रोतों से भारी रकम हासिल करने के आरोप लगाए गए थे।

इसके आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी एन्फोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की और जांच आगे बढ़ाई। हालांकि, एजेंसी ने 24 घंटे की इस तलाशी और पूछताछ के बाद फिलहाल किसी की औपचारिक गिरफ्तारी नहीं की है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जब्त किए गए सभी डिजिटल रिकॉर्ड और बहीखातों को फॉरेंसिक ऑडिट के लिए भेजा गया है। 'अखबार-ए-मशरिक' कोलकाता के अलावा दिल्ली, रांची, आसनसोल, सिलीगुड़ी, भोपाल, लखनऊ और श्रीनगर से भी छपता है।

एजेंसी अब मनी ट्रेल (पैसों के आने और जाने के रास्ते) का पता लगाने में जुटी है। यदि 60 करोड़ रुपये के लेन-देन में हवाला सिंडिकेट या शेल कंपनियों की सीधी संलिप्तता पाई जाती है, तो टीएमसी सांसद और उनके करीबियों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।