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September 07 2026 09:09 pm

बाढ़ से बर्बाद हुए मठ-मंदिरों के पुनर्निर्माण में सरकार करेगी पूरा सहयोग: सीएम योगी ने दिए त्वरित सर्वे और मरम्मत के निर्देश

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उत्तर प्रदेश के पावन तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के अप्रत्याशित उफान और भारी बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ ने न केवल आम जनजीवन, मकानों और फसलों को भारी चोट पहुंचाई है, बल्कि क्षेत्र के सदियों पुराने मठों, मंदिरों और धार्मिक धरोहरों को भी व्यापक क्षति पहुंचाई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस त्रासदी के बीच संतों, पुजारियों और श्रद्धालुओं को बड़ा संबल दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व तकनीकी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुए सभी मठ-मंदिरों, देवालयों और धार्मिक परिसरों का युद्धस्तर पर स्थलीय सर्वे कराया जाए। सीएम ने घोषणा की है कि इन ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णोद्धार, सुरक्षा और मरम्मत के लिए राज्य सरकार हर संभव वित्तीय व प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगी।

रामघाट पर संत तुलसीदास की क्षतिग्रस्त प्रतिमा देखकर जताई चिंता

चित्रकूट प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे ऐतिहासिक रामघाट पहुंचे, जो मंदाकिनी नदी के तेज प्रवाह के चलते सबसे ज्यादा जलमग्न हुआ था। निरीक्षण के दौरान सीएम योगी गोस्वामी संत तुलसीदास जी की उस प्रतिमा के पास भी पहुंचे, जो बाढ़ के भारी दबाव और मलबे से आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी।

प्रतिमा की स्थिति देखकर मुख्यमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की और मौके पर मौजूद संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि संत तुलसीदास की प्रतिमा का तत्काल सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापन और सुरक्षात्मक जीर्णोद्धार कराया जाए। इसके साथ ही रामघाट की सीढ़ियों, छतरियों और घाट से सटे प्राचीन देवालयों के ढांचागत नुकसान का ब्योरा तुरंत तैयार करने को कहा गया है।

मठ-मंदिरों और आश्रमों के लिए विशेष कार्ययोजना: शुरू होगा जीर्णोद्धार

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि चित्रकूट प्रभु श्रीराम की कर्मभूमि और ऋषि-मुनियों की तपोस्थली है, जिसकी आध्यात्मिक पहचान यहां के मठ-मंदिर और साधु-संत हैं।

सरकार द्वारा जारी निर्देशों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

क्षति का तकनीकी आंकलन: लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई विभाग और पर्यटन विभाग की संयुक्त टीम प्रभावित मठों, आश्रमों और मंदिरों की दीवारों, नींव और परिक्रमा मार्गों की मजबूती की जांच करेगी।

सरकारी वित्तीय सहायता: ट्रस्टों और प्रबंधन समितियों के साथ समन्वय बनाकर जिन मंदिरों में जलभराव से भारी ढांचागत टूट-फूट हुई है, उनके पुनर्निर्माण के लिए विशेष राहत पैकेज और सहायता राशि दी जाएगी।

साधु-संतों को राहत सामग्री: बाढ़ के दौरान आश्रमों में फंसे साधु-संतों और बटुकों के लिए राशन किट, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य परीक्षण की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

मंदाकिनी के कैचमेंट एरिया से हटेगा अतिक्रमण, सुरक्षित होंगे घाट

मठ-मंदिरों को भविष्य की बाढ़ से बचाने के लिए सीएम योगी ने प्राकृतिक जलप्रवाह को बहाल करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब भी नदी के जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) या जलनिकासी मार्गों पर अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण किया जाता है, तो पानी का रुख बस्तियों और देवालयों की ओर मुड़ जाता है।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को मंदाकिनी नदी के किनारे से अवैध निर्माण हटाने, घाटों के वैज्ञानिक विस्तारीकरण की योजना बनाने और नदी पर बने फुट ओवरब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने का टास्क सौंपा है। उन्होंने दोहराया कि मंदाकिनी की अविरलता और निर्मलता बनाए रखना शासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी नाले या सीवर का गंदा पानी नहीं गिरने दिया जाएगा।

'आस्था के केंद्रों को संवारने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी सरकार'

मुख्यमंत्री ने स्थानीय साधु-संतों और नागरिकों से संवाद करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान कामदनाथ और ऋषि-मुनियों की कृपा से इतने भीषण जलस्तर के बावजूद जनहानि नहीं हुई। उन्होंने आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार संकट की इस घड़ी में हर प्रभावित परिवार, व्यापारी और धार्मिक संस्थान के साथ मजबूती से खड़ी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सर्वे की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लालफीताशाही न हो और जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन की व्यवस्था को पहले की तरह सुगम बनाया जाए।