बांग्लादेश में जनमत संग्रह पर घमासान, अवामी लीग ने यूनुस की अंतरिम सरकार को बताया अवैध
India News Live,Digital Desk : बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित तथाकथित जनमत संग्रह न केवल संवैधानिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है, बल्कि जनता को गुमराह करने का एक सुनियोजित प्रयास भी है।
‘संवैधानिक इतिहास पर काला धब्बा’
अवामी लीग का कहना है कि 12 फरवरी को आम चुनावों के साथ कराया जाने वाला जनमत संग्रह यूनुस सरकार का एक भद्दा मजाक है, जो बांग्लादेश के संवैधानिक इतिहास में काले धब्बे के रूप में दर्ज होगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिना किसी जनादेश के एक अवैध सरकार देश का भविष्य तय करने की कोशिश कर रही है।
जुलाई 2024 की घटनाओं का हवाला
पार्टी ने कहा कि जुलाई 2024 में चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए देशभर में सुनियोजित दंगे भड़काए गए। इसके बाद मुहम्मद यूनुस और उनकी तथाकथित सलाहकार परिषद जिस तरह सत्ता पर काबिज हुई, वह संविधान और लोकतंत्र दोनों के लिए शर्मनाक अध्याय है।
अवामी लीग ने आरोप लगाया कि यह तख्तापलट इस्लामी उग्रवादी संगठनों के सक्रिय समर्थन, सेना के एक वर्ग की चुप्पी और विदेशी फंडिंग के सहारे अंजाम दिया गया, जो सहमति नहीं बल्कि विश्वासघात के जरिए सफल हुआ।
‘एकतरफा चुनाव, जनता के पैसे की बर्बादी’
अवामी लीग नेता मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने इस प्रक्रिया को एकतरफा चुनाव करार देते हुए कहा कि इससे जनता के धन की बर्बादी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी परिस्थितियों में बनी कोई भी सरकार लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी अवामी लीग मजबूत बनी रहेगी।
जमात और अमेरिका के संबंधों पर चिंता
इस बीच, बांग्लादेश के प्रसिद्ध कवि, लेखक और राजनीतिक दार्शनिक फरहाद मजहर ने कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई। उन्होंने इसे देश के लिए खतरनाक और अशुभ संकेत बताया।
टी20 वर्ल्ड कप बहिष्कार पर भी उठे सवाल
अंतरिम सरकार की नीतियों पर सांस्कृतिक जगत से भी विरोध सामने आया है। बांग्लादेशी थिएटर अभिनेत्री और निर्देशक रोकेया प्राची ने भारत में टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इन्कार करने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे राजनीतिक हथियार बताते हुए कहा कि यूनुस सरकार भारत-विरोधी भावना का इस्तेमाल कर दोनों देशों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की आम जनता 1971 में भारत के समर्थन के लिए आज भी आभारी है और ऐसे फैसले जनभावनाओं के खिलाफ हैं।