बार एसोसिएशन में महिला आरक्षण पर अभद्र टिप्पणी: वकील विभास कुमार झा पर भड़के CJI सूर्यकांत

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India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के आदेश के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले एक वकील को कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे 'आपराधिक अवमानना' (Criminal Contempt) करार दिया है। सुनवाई के दौरान सीजेआई की नाराजगी इस कदर थी कि उन्होंने वकील से सीधे पूछ लिया कि आखिर क्यों न उनका वकालत का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाए।

"क्या वकालत करने से न रोका जाए?"

रोहिणी जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकील विभास कुमार झा ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने बार एसोसिएशन और राज्य विधिज्ञ परिषदों (State Bar Councils) में महिलाओं और कुछ अनुसूचित जातियों को आरक्षण देने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान वकील से पूछा, "आपका वकालत का लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए? क्या आपको वकील के रूप में काम करने से रोका नहीं जाना चाहिए?" कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि वकील सहयोग नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जाए। साथ ही, झा को अगली सुनवाई में अपनी कानून की डिग्री भी रिकॉर्ड पर पेश करने का आदेश दिया गया है।

महिला वकील पर हुए हमले का भी लिया संज्ञान

इसी बेंच ने एक अन्य गंभीर मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट की महिला वकील पर उनके पति द्वारा किए गए 'तलवार और चाकू' से हमले का भी स्वतः संज्ञान लिया है। अधिवक्ता स्नेहा कालिता के पत्र पर संज्ञान लेते हुए सीजेआई ने इस क्रूरता पर गहरी चिंता जताई।

मामले की मुख्य बातें:

हमला: 22 अप्रैल को सोनिया विहार में पीड़िता के पति मनोज कुमार ने उन पर जानलेवा हमला किया था।

गिरफ्तारी: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पति को 25-26 अप्रैल की दरमियानी रात गिरफ्तार कर लिया गया है।

वजह: पुलिस के अनुसार, हमला घरेलू कलह और पारिवारिक विवाद के कारण किया गया था।

CJI की सख्त नसीहत: "सम्मान जरूरी है"

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने वकीलों और सरकारी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायिक व्यवस्था और समाज के किसी भी वर्ग, विशेषकर महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा या हिंसा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे पहले भी सीजेआई ने एक सरकारी वकील को फटकार लगाते हुए कहा था कि नागरिकों का सम्मान करना सीखें। बार एसोसिएशन में आरक्षण के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को कोर्ट ने न्यायपालिका की गरिमा पर चोट माना है।