पंजाब की राजनीति में 'राइट टू रिकॉल' का दांव: भगवंत मान राष्ट्रपति से करेंगे AAP छोड़कर भाजपा में गए सांसदों की शिकायत
India News Live,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची भगदड़ और सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। मान अगले हफ्ते दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और उन सांसदों को वापस बुलाने (Recall) की मांग करेंगे जिन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस मांग के लिए मान ने अपने ही पूर्व सहयोगी राघव चड्ढा के उस बयान को हथियार बनाया है, जो उन्होंने कुछ समय पहले राज्यसभा में दिया था।
राघव चड्ढा के बयान से ही भाजपा को घेरने की तैयारी
मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस रणनीति ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल, इसी साल फरवरी में राघव चड्ढा ने राज्यसभा में 'राइट टू रिकॉल' (Right to Recall) की जोरदार वकालत की थी। चड्ढा ने तर्क दिया था कि यदि जनता किसी नेता को चुन सकती है, तो खराब प्रदर्शन या दल-बदल की स्थिति में उसे पद से हटाने का अधिकार भी मतदाताओं के पास होना चाहिए। अब मान इसी 'नैतिक और लोकतांत्रिक' आधार पर राष्ट्रपति से उन सांसदों की सदस्यता रद्द करने या उन्हें वापस बुलाने की अपील करेंगे।
क्या था राघव चड्ढा का 'राइट टू रिकॉल' प्रस्ताव?
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान बोलते हुए राघव चड्ढा ने भारतीय चुनावी लोकतंत्र की एक बड़ी खामी की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था, "चुनाव से पहले नेता जनता के पीछे भागता है और चुनाव के बाद जनता नेता के पीछे। 5 साल का कार्यकाल बहुत लंबा होता है, और अगर कोई गलत प्रतिनिधि चुन लिया जाए तो पूरा क्षेत्र पिछड़ेपन की गर्त में जा सकता है।" उन्होंने 'राइट टू रिकॉल' को लोकतंत्र के लिए एक 'बीमा पॉलिसी' बताया था। भगवंत मान अब इसी तर्क को आधार बनाकर दलबदलू सांसदों पर प्रहार कर रहे हैं।
राष्ट्रपति से मुलाकात का एजेंडा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भगवंत मान का दिल्ली दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है। वे उन सात सांसदों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहते हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी के जनादेश का अपमान करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। मान का तर्क है कि इन सांसदों को 'आप' के नाम पर वोट मिले थे, इसलिए भाजपा में जाने के बाद उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
'आप' की छटपटाहट और भाजपा का रुख
राघव चड्ढा समेत कई बड़े चेहरों के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही आम आदमी पार्टी बैकफुट पर नजर आ रही है। संजय सिंह जैसे नेताओं ने भी इस टूट पर हैरानी जताई थी। दूसरी ओर, भाजपा ने इन सांसदों का स्वागत करते हुए इसे 'अंतरात्मा की आवाज' और 'आप' की नीतियों से मोहभंग बताया है।
अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस मांग पर क्या संज्ञान लेती हैं और क्या भगवंत मान का यह 'राइट टू रिकॉल' वाला दांव दलबदलू सांसदों की सदस्यता के लिए कोई खतरा पैदा कर पाएगा।