CIA precision tracking and Israel's 'Operation 60 Seconds': कैसे मिट्टी में मिला खामनेई का गुरूर

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India News Live,Digital Desk : 28 फरवरी 2026 की वो सुबह इतिहास के पन्नों में ईरान के लिए 'ब्लैक सैटरडे' के रूप में दर्ज हो गई है। ईरान के सबसे ताकतवर शख्स और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का अंत इतना अचानक और विध्वंसक होगा, इसकी कल्पना तेहरान के सुरक्षा घेरे ने कभी नहीं की थी। सीआईए (CIA) की महीनों की जासूसी और इजरायली खुफिया एजेंसी की घातक रणनीति ने महज 60 सेकेंड के भीतर ईरान के पूरे राजनीतिक और सुरक्षा नेतृत्व को नेस्तनाबूद कर दिया।

शनिवार सुबह 9:40: जब तेहरान के आसमान से बरसी मौत

ऑपरेशन की शुरुआत शनिवार सुबह ठीक 9:40 बजे हुई। इजरायल के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान घंटों पहले से लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस होकर ईरान की सीमा के पास मंडरा रहे थे। जैसे ही ग्रीन सिग्नल मिला, तेहरान के मध्य में स्थित 'लीडरशिप कंपाउंड' पर मिसाइलों की बौछार कर दी गई। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला इतना सटीक था कि खामनेई को संभलने का एक मौका तक नहीं मिला। लगभग एक साथ हुए इन धमाकों ने पूरे परिसर को मलबे के ढेर में बदल दिया।

CIA की 'इंटेलिजेंस विंडो' और बदला हुआ प्लान

इस पूरे ऑपरेशन की पटकथा महीनों पहले लिखी जा चुकी थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA खामनेई की हर हरकत, उनकी दिनचर्या और उनके गुप्त ठिकानों पर नजर रख रही थी। पहले योजना रात में हमला करने की थी, लेकिन शनिवार सुबह जब यह पक्का हो गया कि खामनेई भूमिगत बंकर के बजाय जमीन के ऊपर (Above Ground) मीटिंग कर रहे हैं, तो इजरायल और अमेरिका ने तुरंत समय बदल दिया। इस 'इंटेलिजेंस विंडो' का फायदा उठाकर सुबह के उजाले में ही काल बनकर मिसाइलें टूट पड़ीं।

60 सेकेंड का वो खौफनाक मंजर: परिवार समेत खत्म हुआ नेतृत्व

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमले में केवल खामनेई ही नहीं, बल्कि सात वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा नेता और उनके परिवार के लगभग एक दर्जन सदस्य भी मारे गए। महज 1 मिनट के भीतर हुए इन सिलसिलेवार हमलों ने ईरान के सैन्य ढांचे की रीढ़ तोड़ दी। इजरायल का दावा है कि इस ऑपरेशन का मकसद न केवल खामनेई को हटाना था, बल्कि ईरान की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई को एक साथ खत्म करना था।

सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे हुए फेल

खामनेई की सुरक्षा को दुनिया की सबसे अभेद्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में गिना जाता था। लेकिन इजरायल और अमेरिका की संयुक्त रणनीति ने यह साबित कर दिया कि तकनीक और सटीक खुफिया जानकारी के सामने कोई भी किला सुरक्षित नहीं है। इस हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं, जिससे पूरी दुनिया अब तीसरे विश्व युद्ध की आहट से सहमी हुई है।