निर्जला एकादशी 2026: क्या इसी दिन से शुरू कर सकते हैं एकादशी व्रत? जानें महत्व और शुभ तिथि

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India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम माना गया है। हर वर्ष आने वाली 24 एकादशियों में 'निर्जला एकादशी' का स्थान सर्वोपरि है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है। चूंकि यह व्रत बिना अन्न और जल के रखा जाता है, इसलिए इसे कठिन व्रतों की श्रेणी में रखा गया है। यदि आप भी एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी एक उत्तम अवसर है।

क्या निर्जला एकादशी से व्रत की शुरुआत करना है शुभ?

कई भक्तों के मन में यह प्रश्न होता है कि क्या एकादशी व्रत की शुरुआत निर्जला एकादशी से की जा सकती है? ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत की शुरुआत करने के लिए अत्यंत शुभ और उत्तम दिन है। इस वर्ष यह व्रत अधिकमास के बाद पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

यदि किसी कारणवश आप निर्जला एकादशी से शुरुआत नहीं कर पाते हैं, तो 'उत्पन्ना एकादशी' (मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष) से भी व्रत का आरंभ किया जा सकता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन एकादशी तिथि की उत्पत्ति हुई थी। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि आप केवल इन दो तिथियों का ही इंतज़ार करें; आप साल के किसी भी माह के शुक्ल या कृष्ण पक्ष की एकादशी से भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करते हुए इस व्रत की शुरुआत कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी 2026: तिथि और पारण का समय

इस वर्ष निर्जला एकादशी की तिथि और पारण का समय निम्न प्रकार है:

एकादशी तिथि का प्रारंभ: 24 जून 2026, शाम 06:12 बजे से।

एकादशी तिथि का समापन: 25 जून 2026, रात 08:09 बजे तक।

व्रत की तिथि (उदया तिथि के अनुसार): 25 जून 2026, गुरुवार।

पारण का समय: 26 जून 2026, शुक्रवार को सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे के बीच।

निर्जला एकादशी व्रत का फल और महत्व

मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस कठिन व्रत को करने से साधक के सभी ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान श्रीहरि की अनुकंपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है और अंत में भक्त मोक्ष को प्राप्त करता है। यदि आप पहली बार इस व्रत को शुरू कर रहे हैं, तो इसे पूरी श्रद्धा और संकल्प के साथ करें।