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September 11 2026 12:56 am

पान मसाला पर बढ़ेगा बोझ, जरूरी चीजें सेस से बाहर—सरकार का बड़ा फैसला

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India News Live,Digital Desk : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि इस नए उपकर का असर आम लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आवश्यक वस्तुओं पर नहीं पड़ेगा। यह सेस केवल चुनिंदा उत्पादों पर ही लगाया जाएगा, और इससे मिलने वाली राशि को अलग-अलग स्वास्थ्य योजनाओं के तहत राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।

यह बिल—हेल्थ सिक्योरिटी सेस और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025—पहले ही संसद से पास हो चुके हैं। लोकसभा में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि यह उपकर खासतौर पर पान मसाला बनाने वाली इकाइयों की उत्पादन क्षमता पर लगाया जाएगा।

पान मसाला की खपत कम करने का प्रयास

सीतारमण ने कहा कि इस उपकर का उद्देश्य पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं की खपत को रोकना है।
उनके अनुसार, “इस उपकर से जो राजस्व प्राप्त होगा, उसका एक हिस्सा स्वास्थ्य जागरूकता या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा और राज्यों को भी दिया जाएगा।”

पान मसाला पर जीएसटी रहेगा 40%, साथ में नया सेस भी

वित्त मंत्री ने बताया कि पान मसाला पर अभी की तरह अधिकतम 40% जीएसटी लागू रहेगा।
इसके अलावा, अब इसकी उत्पादन क्षमता के आधार पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस भी लगाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र, दोनों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद करेगा।

चूंकि पान मसाला पर सीधे उत्पाद शुल्क नहीं लगाया जा सकता, इसलिए इसके लिए अलग उपकर विधेयक लाया गया है ताकि उत्पादन और उपभोग—दोनों स्तरों पर कर लगाया जा सके।

तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों पर टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव

वर्तमान में तंबाकू, पान मसाला और इसी तरह के उत्पादों पर 28% जीएसटी लगता है और इसके अलावा क्षतिपूर्ति उपकर भी लगाया जाता है।
जब क्षतिपूर्ति उपकर पूरी तरह हट जाएगा, तब:

तंबाकू उत्पादों पर 40% जीएसटी + उत्पाद शुल्क लागू होगा

पान मसाला पर 40% जीएसटी + नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा

सरकार ने इससे जुड़े उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक में कई नए प्रस्ताव दिए हैं:

सिगार, चुरूट और सिगरेट पर 1,000 स्टिक पर 5,000 से 11,000 रुपये तक उत्पाद शुल्क

अनिर्मित तंबाकू पर 60–70% तक उत्पाद शुल्क

निकोटीन और इनहेल्ड प्रोडक्ट्स पर 100% उत्पाद शुल्क

सरकार का मानना है कि इससे हानिकारक वस्तुओं की खपत कम करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत फंडिंग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।