Big relief to Swami Avimukteshwarananda : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, अग्रिम जमानत पर आदेश सुरक्षित

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India News Live,Digital Desk : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिगों के कथित यौन शोषण मामले में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को हुई मैराथन सुनवाई के बाद अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

एक घंटे तक चली तीखी बहस, खचाखच भरी थी अदालत

प्रयागराज स्थित हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ के समक्ष यह मामला शुक्रवार शाम को पेश हुआ। कोर्ट रूम नंबर 72 में करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक चली इस सुनवाई के दौरान वकीलों और समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि यह मामला पूरी तरह से साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जबकि पीड़ितों की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया गया।

क्या है पूरा विवाद? (पाक्सो एक्ट का मामला)

FIR और आरोप: आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) के आदेश के बाद बीते रविवार को प्रयागराज के झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी।

घटनाक्रम: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी स्वामी मुकुंदानंद पर माघ मेला और महाकुंभ के दौरान नाबालिगों के साथ कुकर्म और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस कार्रवाई: मामला दर्ज होने के बाद झूंसी पुलिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज करने के साथ ही उनका मेडिकल परीक्षण भी संपन्न करा लिया है।

साजिश बनाम न्याय की लड़ाई

बचाव पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि एक पीड़ित को जानबूझकर नाबालिग बताया गया है ताकि पाक्सो एक्ट की धाराएं लगाई जा सकें। वहीं, दूसरी ओर श्रीविद्या मठ के छात्रों ने भी हाल ही में दावा किया था कि मठ को फंसाने के लिए वीडियो के जरिए साजिश रची गई थी। इन विरोधाभासी दावों के बीच हाई कोर्ट का गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए कानूनी राहत की पहली बड़ी सीढ़ी माना जा रहा है।

अगला कदम और सुरक्षित आदेश

कोर्ट ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कोर्ट उन्हें नियमित अग्रिम जमानत प्रदान करता है या नहीं। फिलहाल, पुलिस इस मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।