छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग का पीछा कर 'I Love You' बोलना पड़ेगा भारी, छेड़छाड़ के आरोपी की सजा बरकरार..
India News Live,Digital Desk : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की को लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उसका पीछा करने वाले आरोपी अजित राव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। जस्टिस की बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी नाबालिग को उसकी मर्जी के खिलाफ बार-बार परेशान करना और 'आई लव यू' कहना केवल सामान्य व्यवहार नहीं, बल्कि कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
चार महीने तक नाबालिग को किया गया प्रताड़ित
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी अजित राव पिछले चार महीनों से नाबालिग लड़की का लगातार पीछा कर रहा था। वह न केवल लड़की के आने-जाने के रास्तों पर खड़ा रहता था, बल्कि बार-बार उसे 'आई लव यू' बोलकर दबाव बनाने की कोशिश करता था। लड़की के बार-बार मना करने के बावजूद आरोपी की हरकतों में कोई सुधार नहीं आया, जिससे परेशान होकर पीड़िता के परिजनों ने पुलिस की शरण ली थी।
कोर्ट ने सुरक्षित समाज के लिए कड़ा रुख अपनाया
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलीलें पेश कीं, लेकिन उच्च न्यायालय ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर पाया कि आरोपी का कृत्य पोक्सो (POCSO) एक्ट और छेड़छाड़ की धाराओं के तहत दंडनीय है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की घटनाएं समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं और नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा बुरा असर डालती हैं। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर युवतियों का पीछा करना और उन्हें अवांछित रूप से परेशान करने वालों के खिलाफ कानून पूरी सख्ती से निपटेगा।
निचली अदालत की सजा को हाईकोर्ट की हरी झंडी
इस मामले में निचली अदालत ने पहले ही अजित राव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी उचित माना है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन मनचलों को कड़ा सबक मिलेगा जो राह चलती लड़कियों को परेशान करना अपना अधिकार समझते हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस निर्णय की प्रदेश भर में चर्चा हो रही है, जिसे महिला सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।