BREAKING:
May 12 2026 06:36 pm

बंगाल नतीजों से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को दी हरी झंडी

Post

India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक तीन दिन पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कानूनी मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें मतगणना प्रक्रिया की निगरानी के लिए केवल केंद्र सरकार या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने की बात कही गई थी। जस्टिस कृष्ण राव की पीठ ने स्पष्ट किया कि वोटों की हेराफेरी संभव नहीं है और चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह से वैध है।

क्या था TMC का विरोध और कोर्ट की टिप्पणी?

तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें प्रत्येक काउंटिंग टेबल पर कम से कम एक पर्यवेक्षक या सहायक के रूप में केंद्र सरकार के कर्मचारी की मौजूदगी अनिवार्य की गई थी। TMC का तर्क था कि केंद्र सरकार के कर्मचारी भाजपा के प्रभाव में काम कर सकते हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी।

हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मतगणना कक्ष में केवल एक पर्यवेक्षक नहीं होता, बल्कि वहां माइक्रो ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और अन्य कर्मी भी मौजूद रहते हैं। कोर्ट ने कहा, "पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में होती है, ऐसे में वोटों की हेराफेरी के आरोपों पर विश्वास करना कठिन है।"

चुनाव आयोग के विशेषाधिकार पर मुहर

जस्टिस कृष्ण राव ने अपने आदेश में कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत चुनाव आयोग को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि वह चुनावी प्रक्रियाओं के सुचारू संचालन के लिए किसे नियुक्त करना चाहता है। कोर्ट ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 19A का हवाला देते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी इस आदेश में कुछ भी अवैध नहीं है।

निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया फैसला

पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। भाजपा समेत विपक्षी दलों ने कई बार आरोप लगाया है कि राज्य सरकार के कर्मचारी सत्ताधारी दल के दबाव में काम करते हैं। इसी अविश्वास को खत्म करने और मतगणना में पारदर्शिता लाने के लिए चुनाव आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर और पर्यवेक्षक के रूप में तैनात करने का निर्णय लिया है।

4 मई को आएंगे नतीजे

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। अब सभी की निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चुनाव परिणामों के बाद किसी भी दल को लगता है कि प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तो वे कानून के तहत चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं।