Bengal Violence : कौन थे चंद्रनाथ रथ? वायु सेना की नौकरी छोड़ बने शुभेंदु के संकटमोचक, हत्या के बाद शोक में डूबे समर्थक
India News Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद जहां जश्न का माहौल होना चाहिए था, वहां एक दुखद खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया है। शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और पूर्व वायु सेना कर्मी चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात मध्यमग्राम में निर्मम हत्या कर दी गई। चंद्रनाथ केवल एक पीए (PA) नहीं थे, बल्कि वह शुभेंदु अधिकारी के उन चुनिंदा साथियों में से थे, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर भाजपा की चुनावी जमीन तैयार की थी।
रामकृष्ण मिशन से IAF तक: अनुशासन और सेवा का सफर
41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ का व्यक्तित्व किसी मंझे हुए राजनेता से बिल्कुल अलग था। मूल रूप से पूर्वी मेदिनीपुर के चांदीपुर के रहने वाले चंद्रनाथ ने अपनी शिक्षा राहारा रामकृष्ण मिशन से पूरी की थी। छात्र जीवन में वह आध्यात्मिक जीवन अपनाने की इच्छा रखते थे, लेकिन किस्मत उन्हें भारतीय वायु सेना (IAF) ले गई। करीब दो दशक तक देश की सरहद पर सेवा देने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली और कुछ समय कॉर्पोरेट जगत में भी काम किया।
दो दशक पुराना रिश्ता: तृणमूल से भाजपा तक का साथ
शुभेंदु अधिकारी और चंद्रनाथ के परिवार का रिश्ता आज का नहीं बल्कि 20 साल पुराना है। चंद्रनाथ की मां हासी रथ तृणमूल कांग्रेस के शासन में पंचायत सदस्य रही थीं। जब 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थामा, तब रथ परिवार ने भी उनके प्रति अपनी वफादारी निभाते हुए भाजपा की सदस्यता ली। चंद्रनाथ आधिकारिक रूप से 2019 में शुभेंदु की टीम में शामिल हुए थे, जब अधिकारी ममता सरकार में कद्दावर मंत्री हुआ करते थे।
पर्दे के पीछे के 'मैनेजर': भवानीपुर जीत में निभाई बड़ी भूमिका
चंद्रनाथ रथ स्वभाव से बेहद शांत और जमीनी स्तर के व्यक्ति थे। वह उन लोगों में शामिल नहीं थे जो टीवी कैमरों के सामने चमकते हैं, बल्कि वह संगठन को मजबूत करने वाले रणनीतिकार थे। शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक अभियानों का प्रबंधन, कार्यकर्ताओं से संवाद और संगठनात्मक तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। भवानीपुर की हाई-प्रोफाइल सीट पर भाजपा के चुनावी अभियान को सफल बनाने में उनकी मुख्य भूमिका रही थी।
अधूरा रह गया सफर
बुधवार की रात जब वह मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके से गुजर रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर करीब से गोलियां चलाकर उनकी जान ले ली। भाजपा सूत्रों का कहना है कि उनकी कमी को पूरा करना मुश्किल होगा। चंद्रनाथ की हत्या ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि बंगाल की राजनीति में चुनाव बाद होने वाली हिंसा के डर को एक बार फिर ताजा कर दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन भाजपा समर्थकों में अपने इस 'मौन योद्धा' को खोने का गम और गुस्सा साफ देखा जा रहा है।