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August 19 2026 01:54 pm

बैंक ऑफ महाराष्ट्र का मुनाफा 27% उछला, NII में रिकॉर्ड 15% की बढ़त के साथ एसेट क्वालिटी हुई फौलादी

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भारतीय बैंकिंग सेक्टर से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गज और पिछले 3 साल में अपने शेयरधारकों को 161% का छप्परफाड़ रिटर्न देकर मल्टीबैगर साबित होने वाले बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक फाइलिंग के मुताबिक, बैंक ने मुनाफे और ब्याज आय के मोर्चे पर दलाल स्ट्रीट की सभी उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए बेहद शानदार प्रदर्शन किया है। जून तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सालाना आधार पर 26.8% की जोरदार छलांग लगाकर ₹2,020 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में ₹1,593 करोड़ था।

ब्याज से हुई छप्परफाड़ कमाई: नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में दर्ज की गई डबल डिजिट ग्रोथ

बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने कोर बैंकिंग ऑपरेशन्स में अपनी मजबूत पकड़ दिखाते हुए नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी डबल डिजिट की शानदार ग्रोथ हासिल की है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के दौरान बैंक की कुल एनआईआई 14.5% की बढ़त के साथ ₹3,770 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इसके मुकाबले ठीक एक साल पहले 2025 की समान तिमाही में बैंक की शुद्ध ब्याज आय ₹3,292 करोड़ रुपये रही थी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैंक की ब्याज कमाई में आई यह बड़ी तेजी देश भर में इसकी मजबूत लोन ग्रोथ (ऋण उठाव) और एडवांस पर मिले बेहतर यील्ड (ब्याज दरों का कुशल प्रबंधन) को साफ तौर पर दर्शाती है।

फंसे कर्ज पर लगा तगड़ा ब्रेक: एसेट क्वालिटी ने बैंकिंग जगत को किया हैरान

इस तिमाही नतीजों का सबसे मजबूत और आकर्षक पहलू बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) रही है, जिसने पूरे बैंकिंग उद्योग के लिए एक नया पैमाना सेट किया है। बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) पिछली तिमाही के मुकाबले 1.45% के निचले स्तर पर पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। इसके साथ ही, नेट एनपीए (Net NPA) भी महज 0.13% पर बिना किसी बदलाव के जस का तस कायम है। नेट एनपीए का शून्य के करीब होना यह साबित करता है कि बैंक की लोन रिकवरी मशीनरी बेहद आक्रामक तरीके से काम कर रही है और नए फंसे हुए कर्जों (Bad Loans) पर पूरी तरह से अंकुश लगा दिया गया है।

प्रोविजनिंग के मोर्चे पर समझदारी: संभावित वित्तीय जोखिमों से निपटने के लिए बैंक तैयार

अगर बात करें प्रोविजनिंग यानी डूबे कर्ज के लिए अलग रखे जाने वाले फंड की, तो जून तिमाही में बैंक की कुल प्रोविजनिंग ₹840 करोड़ रुपये रही है। हालांकि यह आंकड़ा पिछली तिमाही के ₹617 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है, लेकिन पिछले साल की समान तिमाही के ₹867 करोड़ रुपये की तुलना में इसमें अच्छी खासी कमी आई है। इस बीच, एनपीए प्रोविजनिंग सालाना आधार पर ₹719 करोड़ से मामूली रूप से बढ़कर ₹756 करोड़ हो गई है। बैंकिंग विश्लेषकों के अनुसार, एनपीए प्रोविजनिंग में की गई यह बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि बैंक का मैनेजमेंट भविष्य के किसी भी संभावित वित्तीय जोखिम या झटके से निपटने के लिए बैलेंस शीट को पूरी तरह सुरक्षित और पर्याप्त बफर बनाए रख रहा है।

3 साल में 161% का रिटर्न: अब आगे क्या होगी मैनेजमेंट की नई रणनीति?

मजबूत शुद्ध मुनाफे, एनआईआई में तेज उछाल और फौलादी एसेट क्वालिटी के दम पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने नए कारोबारी साल की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की है। गौरतलब है कि इस सरकारी बैंक ने पिछले 3 वर्षों में दलाल स्ट्रीट पर अपने निवेशकों की वेल्थ को 161% से ज्यादा बढ़ाकर एक बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड स्थापित किया है। शानदार वित्तीय नतीजों के बाद अब घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की नजरें बैंक के शीर्ष प्रबंधन की भविष्य की लोन ग्रोथ रणनीति, डिजिटल बैंकिंग विस्तार और आगामी तिमाहियों के प्रदर्शन पर टिक गई हैं