ईरान युद्ध की आग में झुलसा बांग्लादेश, मोबाइल नेटवर्क ठप होने की कगार पर; इंटरनेट सेवाओं पर बड़ा संकट

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India News Live,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जारी संघर्ष की तपिश अब मोबाइल स्क्रीन और इंटरनेट तक पहुंच गई है। ईंधन की भारी किल्लत से जूझ रहे बांग्लादेश में अब संचार व्यवस्था चरमराने का खतरा पैदा हो गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि मोबाइल टावर और डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए जरूरी डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं कभी भी ठप हो सकती हैं।

95% आयात पर निर्भरता बनी मुसीबत

करीब 17 करोड़ की आबादी वाला बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों (तेल और गैस) के लिए 95 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट से आने वाले तेल के रास्ते (होर्मुज जलडमरूमध्य) में जारी सैन्य नाकेबंदी ने सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ दिया है। इसका सीधा असर देश की बिजली सप्लाई और अब टेलीकॉम सेक्टर पर पड़ रहा है।

12-12 घंटे की कतारें और 15% तक बढ़ी कीमतें

राजधानी ढाका सहित प्रमुख शहरों में पेट्रोल पंपों पर युद्ध जैसे हालात हैं। लोगों को ईंधन के लिए 12-12 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने डीजल की कीमतों में 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है, लेकिन किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बिजली संकट के कारण बांग्लादेश का प्रमुख गारमेंट उद्योग पहले ही 30 प्रतिशत उत्पादन की गिरावट झेल रहा है।

डेटा सेंटर और नेटवर्क टावरों पर मंडराया खतरा

बांग्लादेश के मोबाइल टेलीकॉम ऑपरेटर्स संगठन (AMTOB) ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है। संगठन के अनुसार:

डीजल पर निर्भरता: बिजली कटौती के दौरान डेटा सेंटर और बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) चलाने के लिए डीजल जनरेटर ही एकमात्र सहारा हैं।

भारी खपत: एक डेटा सेंटर को चलाने के लिए प्रति घंटे 500 से 600 लीटर डीजल की जरूरत होती है।

लंबी बिजली कटौती: रोजाना 5 से 8 घंटे की लोड शेडिंग ने बैकअप सिस्टम को पूरी तरह ड्रेन कर दिया है।

बैंकिंग और SMS सेवाएं भी होंगी प्रभावित

AMTOB के महासचिव मोहम्मद जुल्फिकार ने चेतावनी दी है कि यदि डेटा सेंटर बंद हुए, तो देश का पूरा डिजिटल ढांचा गिर जाएगा। इससे न केवल कॉलिंग और इंटरनेट बंद होगा, बल्कि SMS सेवाएं, मोबाइल बैंकिंग (MFS) और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन भी पूरी तरह ठप हो जाएंगे। यह स्थिति बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर के लिए घातक साबित हो सकती है।