असम-बंगाल में भाजपा की जीत से बांग्लादेश में बेचैनी बॉर्डर पर सेना अलर्ट, गृह मंत्री बोले 'पुशबैक' हुआ तो देंगे जवाब
India News Live, Digital Desk: असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से 'अवैध घुसपैठ' और 'पुशबैक' (संदिग्ध प्रवासियों को वापस भेजना) के मुद्दे पर बांग्लादेश सरकार अब रक्षात्मक मोड में नजर आ रही है। बांग्लादेश को डर है कि भारत के इन दोनों सीमावर्ती राज्यों में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को सतर्क रहने के आदेश
बुधवार को राजधानी ढाका में आयोजित जिलाधिकारियों के सम्मेलन के दौरान बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। जब उनसे भारत से प्रवासियों को जबरन वापस भेजे जाने की आशंका पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि ऐसी कोई घटना नहीं होगी। लेकिन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हमने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को सीमाओं पर अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।"
सत्ताधारी पार्टी BNP का कड़ा रुख: 'एक्शन लेगा ढाका'
बांग्लादेश की मौजूदा सत्ताधारी पार्टी BNP ने भी इस मुद्दे पर कड़े संकेत दिए हैं। पार्टी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के हवाले से कहा गया कि यदि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के दौरान ऐसी कोई भी स्थिति पैदा होती है, जिसमें लोगों को जबरन सीमा पार धकेला जाए, तो ढाका इस पर चुप नहीं बैठेगा और उचित कार्रवाई करेगा।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में 3 बड़ी अड़चनें
दोनों देशों के बीच संबंध वर्तमान में एक नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, जिसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जा रहे हैं:
शेख हसीना का प्रत्यर्पण: अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद पूर्व पीएम शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश सरकार उनके प्रत्यर्पण की लगातार मांग कर रही है, जो भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती है।
घुसपैठ और पुशबैक: भाजपा का चुनाव अभियान मुख्य रूप से अवैध घुसपैठ को रोकने और एनआरसी (NRC) जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है, जिसे बांग्लादेश अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानता है।
तीस्ता जल समझौता: 2011 से लंबित तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा अब भी अनसुलझा है, जिस पर ममता बनर्जी के कड़े रुख के कारण पेंच फंसा हुआ था।
भारत का रुख: "रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश"
तनाव के बीच भारत की ओर से सकारात्मक संदेश भी आए हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बांग्लादेशी पत्रकारों से मुलाकात के दौरान स्वीकार किया कि दोनों देशों ने हाल के दिनों में एक 'मुश्किल समय' देखा है। उन्होंने कहा, "हम द्विपक्षीय संबंधों और आपसी संपर्कों के सभी 40 से अधिक तंत्रों (मैकेनिज्म) को फिर से सक्रिय करने पर काम कर रहे हैं।"
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की जीत के बाद भारत सरकार के लिए सुरक्षा और कूटनीति के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी। जहां एक ओर सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवास को रोकना प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश के साथ रणनीतिक संबंधों को बचाए रखना भी अनिवार्य है।