होर्मुज जलडमरूमध्य: तनाव के बीच फ्रांसीसी पोत ने पार की ईरानी बाधा, क्या काम आई मैक्रों की 'कूटनीति'
India News Live,Digital Desk : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर लगे अघोषित प्रतिबंधों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। फ्रांसीसी जहाजरानी कंपनी CMA CGM द्वारा संचालित कंटेनर पोत 'CMA CGM क्रिबी' (CMA CGM Kribi) ने सफलतापूर्वक इस स्ट्रेट को पार कर लिया है। इसे ईरान द्वारा मार्ग बाधित किए जाने के बाद किसी पश्चिमी देश से जुड़े पहले बड़े पोत की सुरक्षित आवाजाही माना जा रहा है।
मैक्रों का बयान और ट्रंप पर 'तंज'
यह घटनाक्रम फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान के ठीक बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई वाली रणनीति पर सवाल उठाए थे।
सैन्य विकल्प को बताया 'अवास्तविक': दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान मैक्रों ने कहा कि बलपूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को खोलना "अवास्तविक" है। उनका इशारा ट्रंप प्रशासन की ओर था, जो लगातार सैन्य अभियान की वकालत कर रहा है।
ईरान के साथ समन्वय: मैक्रों का मानना है कि होर्मुज को केवल ईरान के साथ बातचीत और युद्धविराम के समन्वय से ही सुरक्षित बनाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की बैलिस्टिक मिसाइलें किसी भी सैन्य प्रयास को विफल कर सकती हैं।
ठप पड़ा है समुद्री व्यापार (90% की गिरावट)
लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में 90% तक की कमी आई है।
सीमित आवाजाही: 1 मार्च 2026 से अब तक केवल 150 जहाज ही यहाँ से गुजरे हैं। इनमें से अधिकांश का संबंध चीन, भारत, पाकिस्तान या खुद ईरान से है।
पहला फ्रांसीसी पोत: 'CMA CGM क्रिबी' माल्टा का ध्वज वाहक है लेकिन इसका संचालन फ्रांस की कंपनी करती है। यह गुरुवार को दुबई से रवाना होकर शुक्रवार को ओमान के मस्कट तट पर सुरक्षित पहुँच गया।
फ्रांस का 'इंटरनेशनल मिशन' प्लान
मैक्रों प्रशासन युद्ध समाप्त होने के बाद होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मिशन (International Mission) के गठन पर जोर दे रहा है।
यूरोपीय भागीदारी: फ्रांस चाहता है कि यूरोपीय और गैर-यूरोपीय देश मिलकर तेल और गैस टैंकरों को सुरक्षा प्रदान करें।
कूटनीतिक बढ़त: जानकारों का मानना है कि फ्रांसीसी पोत का सुरक्षित गुजरना यह संकेत दे सकता है कि ईरान के साथ फ्रांस की कूटनीतिक लाइन (बातचीत का रास्ता) अमेरिका की 'सख्त कार्रवाई' वाली नीति के मुकाबले अधिक प्रभावी साबित हो रही है।
फिलहाल, CMA CGM कंपनी ने इस संवेदनशील पारगमन (Transit) पर कोई भी आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। लेकिन वैश्विक बाजारों की नजर अब इस पर है कि क्या अन्य पश्चिमी देश भी फ्रांस के इस 'शांतिपूर्ण समन्वय' वाले रास्ते को अपनाते हैं या नहीं।