अनिल अंबानी पर बैंकिंग फ्रॉड केस: सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण का सवाल "कर्मचारी जेल में तो मालिक बाहर क्यों?"
India News Live,Digital Desk : अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को तीखी बहस हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब इस घोटाले में शामिल कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, तो मुख्य आरोपी अनिल अंबानी अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर क्यों हैं? इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया।
"मुख्य सूत्रधार अब तक आजाद क्यों?"— प्रशांत भूषण
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए प्रशांत भूषण ने दलील दी कि सीबीआई और ईडी ने अपनी वस्तुस्थिति रिपोर्ट (Status Report) तो दाखिल कर दी है, लेकिन कार्रवाई में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जांच एजेंसियों ने अनिल अंबानी को मुख्य आरोपी के रूप में पहचाना है, लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा जा रहा है, जबकि घोटाले के असली सूत्रधार बाहर हैं।"
सरकार का जवाब: "फलां व्यक्ति की गिरफ्तारी पर नहीं दे सकते सफाई"
सीबीआई और ईडी की ओर से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन सवालों को टालते हुए कहा कि वह किसी विशिष्ट व्यक्ति की गिरफ्तारी या गैर-गिरफ्तारी के कारणों पर स्पष्टीकरण देने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं इस बात का जवाब नहीं दे सकता कि 'फलां' व्यक्ति को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है। हमने जांच से जुड़ी नई रिपोर्ट्स अदालत को सौंप दी हैं और एजेंसियां कानून के मुताबिक काम कर रही हैं।"
कपिल सिब्बल ने मांगा समय, 8 मई को अगली सुनवाई
अनिल अंबानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाए क्योंकि उनके पास कुछ ऐसे तथ्य हैं जो अब तक किसी अदालत के सामने नहीं आए हैं। अदालत ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए कहा कि रिपोर्ट पर कोई भी फैसला लेने से पहले उनका पक्ष सुना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 8 मई 2026 को तय की गई है।
कोर्ट ने पहले जताई थी नाराजगी
बता दें कि यह सुनवाई पूर्व नौकरशाह ईएएस शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर हो रही है, जिसमें 40,000 करोड़ रुपये के इस विशाल बैंकिंग घोटाले की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। इससे पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी के 'ढीले ढाले' रवैये पर सख्त नाराजगी जताई थी और जांच में पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे।