UN में पाकिस्तान-चीन की भारी फजीहत! अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर फ्लॉप किया 'ड्रैगन' का बड़ा प्लान

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर पाकिस्तान और उसके सदाबहार दोस्त चीन को एक बहुत बड़ा और करारा कूटनीतिक झटका लगा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसके आत्मघाती विंग 'मजीद ब्रिगेड' को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कराने की इस्लामाबाद और बीजिंग की साझा कोशिश औंधे मुंह गिर गई है। दुनिया के तीन सबसे शक्तिशाली देशों—अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने वीटो पावर और अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान और चीन के इस संयुक्त प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में ब्लॉक (रोक) कर दिया है।

UNSC की 1267 समिति में ऐसे फेल हुआ पाक-चीन का दांव

पाकिस्तानी हुकूमत और ड्रैगन (चीन) ने पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिष्ठित 1267 'अल-कायदा प्रतिबंध समिति' के तहत BLA और मजीद ब्रिगेड पर अंतरराष्ट्रीय बैन लगाने की फाइल आगे बढ़ाई थी। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह चीन की मदद से इस प्रस्ताव को पास करा लेगा। लेकिन इस महीने सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी, वीटो-संपन्न सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस) ने एकजुट होकर इस प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी। इसे इस्लामाबाद और बीजिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर बहुत शर्मनाक हार माना जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि चीन ने अतीत में भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पोषित खूंखार आतंकियों (जैसे साजिद मीर और अब्दुल रहमान मक्की) को वैश्विक आतंकी घोषित करने के हर प्रस्ताव में बार-बार अड़ंगा लगाया था। अब ठीक वैसा ही कूटनीतिक कर्मा चीन और पाकिस्तान को भुगतना पड़ा है।

अफगानिस्तान के ठिकानों का रोना रोता रहा पाकिस्तान

UN में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद के सामने गिड़गिड़ाते हुए इस मामले में तुरंत एक्शन लेने की अपील की थी। पाकिस्तानी राजदूत ने परिषद को दलील दी थी कि आईएसआईएल-के (ISIL-K), अल-कायदा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) और BLA जैसे संगठन अफगानिस्तान की जमीन से ऑपरेट हो रहे हैं। अहमद ने दावा किया था कि अफगानिस्तान में फिलहाल 60 से ज्यादा आतंकी कैंप एक्टिव हैं, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान में सीमा पार घुसपैठ और हमलों के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान 2025-26 के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य भी है, इसके बावजूद वह अपने हक में माहौल नहीं बना पाया।

अमेरिका ने खुद लगाया है बैन, फिर UN में क्यों रोका प्रस्ताव?

इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि अमेरिका ने खुद अपने घरेलू कानूनों के तहत बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को 'विदेशी आतंकवादी संगठन' घोषित कर रखा है। साल 2019 में ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने BLA को 'विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी' (SDGT) की लिस्ट में डाला था।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे आतंकवाद के खिलाफ हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति का एक विशिष्ट दायरा और कानूनी ढांचा है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन का मानना है कि पाकिस्तान और चीन इस समिति का राजनीतिक इस्तेमाल अपने रणनीतिक हितों और बलूच स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए कर रहे हैं, जो इस समिति के नियमों के अनुकूल नहीं है।

इन खौफनाक और खूनी हमलों से कांपा है पाकिस्तान

अमेरिकी विदेश विभाग और वैश्विक खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और इसके आत्मघाती दस्ते 'मजीद ब्रिगेड' ने हाल के सालों में पाकिस्तान और वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों पर कई विनाशकारी हमलों को अंजाम दिया है। साल 2024 में BLA ने कराची इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास और चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट 'ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी कॉम्प्लेक्स' में भीषण आत्मघाती हमले किए थे।

वहीं, साल 2025 में इस संगठन ने क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन का बीच रास्ते में अपहरण कर लिया था। इस सनसनीखेज वारदात में 31 नागरिक और पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए थे, जबकि 300 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया गया था। इन हमलों के जरिए BLA लगातार पाकिस्तान में चीनी निवेश (CPEC) को निशाना बना रहा है, यही वजह है कि बीजिंग इसे वैश्विक स्तर पर कुचलना चाहता था, जिसमें वह नाकाम रहा।