अक्षय तृतीया 2026: सोना हुआ 'सुपरहिट'! गोल्ड ETF ने दिया 61% तक का छप्परफाड़ रिटर्न
India News Live,Digital Desk : अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर इस बार केवल आस्था की चमक नहीं, बल्कि निवेशकों की जेब भी चमक रही है। पिछले एक साल में भारतीय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) ने शेयर बाजार के कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए 61% तक का बंपर रिटर्न दिया है। गोल्डबीज़ (GoldBees), एचडीएफसी गोल्ड और आईसीआईसीआई गोल्ड जैसे फंड्स में आई इस भारी तेजी ने निवेशकों को गदगद कर दिया है, लेकिन साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या यह सोना बेचने का समय है?
सोने की कीमतों में आग लगने के 3 बड़े कारण
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में आई इस रिकॉर्ड तोड़ तेजी के पीछे तीन मुख्य ट्रिगर काम कर रहे हैं:
भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया भर में युद्ध जैसी स्थितियों और बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के लिए सोने का दामन थामा है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: भारत सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी करेंसी को मजबूती देने के लिए लगातार सोने का भंडार (Gold Reserves) बढ़ा रहे हैं, जिससे डिमांड में भारी उछाल आया है।
महंगाई का डर: बढ़ती मुद्रास्फीति (Inflation) के चलते लोग अपनी पूंजी की वैल्यू बचाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बजाय सोने पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह: क्या करें और क्या न करें?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में सोने का मूल्यांकन (Valuation) काफी ऊपर जा चुका है। ऐसे में निवेशकों को संतुलित रुख अपनाना चाहिए:
प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफा वसूली): यदि आपके कुल निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 10% से 15% से ज्यादा हो गई है, तो थोड़े हिस्से को बेचकर मुनाफा कमाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
SIP जारी रखें: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सलाह है कि वे सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को न रोकें। गिरावट आने पर यह आपको औसत खरीदारी का फायदा देगा।
अनुशासन का पालन: बाजार में ज्यादा उत्साह (FOMO) में आकर एकमुश्त (Lumpsum) बड़ा निवेश करने से बचें।
ट्रेडर्स के लिए रणनीति: ग्लोबल मार्केट पर रखें नजर
स्विंग ट्रेडर्स और शॉर्ट टर्म निवेशकों को आने वाले दिनों में वैश्विक ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखनी होगी। अक्षय तृतीया के दौरान भारत में भौतिक सोने (Physical Gold) की मांग बढ़ती है, जिससे कीमतों में अस्थिरता आ सकती है। हालांकि बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली होने पर कीमतों में कुछ सुधार (Correction) देखने को मिल सकता है, जो नए खरीदारों के लिए 'Buy on Dips' (गिरावट पर खरीदारी) का मौका होगा।