यूपी चुनाव 2027: 'अखिलेश का चेक बाउंस नहीं होगा', कुमार विश्वास की भविष्यवाणी ने बढ़ाई भाजपा की धड़कनें

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच मशहूर कवि और राजनीतिक विश्लेषक कुमार विश्वास के एक ताजा बयान ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। विश्वास ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यूपी का आगामी चुनावी मुकाबला एकतरफा बिल्कुल नहीं होने वाला है। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव की रणनीति को लेकर जो दावे किए हैं, उससे सत्ताधारी खेमे में हलचल मचना तय है।

लोकसभा की जीत कोई तुक्का नहीं, विधानसभा में दिखेगा असली दम

कुमार विश्वास ने एक इंटरव्यू के दौरान अखिलेश यादव की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 में अखिलेश ने जो सियासी 'चेक' काटा था, वह बाउंस नहीं हुआ है। उन्होंने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो यह मान रहे हैं कि लोकसभा की सफलता महज एक इत्तेफाक थी। विश्वास के मुताबिक, लोकसभा की सीटें बड़ी होती हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव छोटी-छोटी सीटों का खेल है। ऐसे में अखिलेश का प्रभाव विधानसभा में और भी ज्यादा शक्तिशाली और मारक तरीके से उभर कर सामने आएगा।

जातीय ध्रुवीकरण: 'कृष्ण नीति' पर चल रही है नई भाजपा

यूपी और बिहार की राजनीति के डीएनए को समझाते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि यहां के चुनाव आज भी जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमते हैं। उन्होंने भाजपा की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह 'अटल जी वाली भाजपा' नहीं है, बल्कि यह 'नई भाजपा' है जो किसी भी कीमत पर जीत हासिल करना चाहती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि बिहार में सरकार बनाने के लिए भाजपा को अपने काडर से बाहर निकलकर जातीय समीकरण साधने पड़े। यूपी में भी यही स्थिति है, जहां जातियां अलग-अलग ध्रुवों में बंटी हुई हैं, जिससे मुकाबला पूरी तरह फंसा हुआ नजर आ रहा है।

अखिलेश के लिए अस्तित्व की लड़ाई, PDA का बढ़ता असर

विश्वास का मानना है कि 2027 का चुनाव अखिलेश यादव के लिए अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद लोकसभा में मिली 37 सीटों की संजीवनी ने सपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। अखिलेश यादव का 'PDA' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूला जमीन पर असर दिखा रहा है। जहां भाजपा इसे 'झूठ की राजनीति' बता रही है, वहीं कुमार विश्वास इसे यूपी में हो रही गहरी जातीय गोलबंदी के रूप में देख रहे हैं। उनके अनुसार, जातियों का यह नया गठबंधन भाजपा की हैट्रिक की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है।