इंसानी शरीर का 'डिजिटल जुड़वां' बनाएगा AI, मार्क जुकरबर्ग ने दांव पर लगाए 4200 करोड़
India News Live, Digital Desk: फेसबुक (Meta) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान अब चिकित्सा जगत में एक ऐसी क्रांति लाने की तैयारी में हैं, जो कल्पना से परे लगती है। उनके शोध संगठन 'चान जुकरबर्ग बायोहब' (Chan Zuckerberg Biohub) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इंसानी कोशिकाओं (Cells) को समझने और उनका डिजिटल मॉडल तैयार करने के लिए भारी-भरकम निवेश किया है। इस प्रोजेक्ट का सीधा उद्देश्य बीमारियों की जड़ तक पहुंचना और उनके इलाज की गति को 10 गुना तक बढ़ाना है।
क्या है वर्चुअल बायोलॉजी इनिशिएटिव? अप्रैल 2026 में चान जुकरबर्ग बायोहब ने "वर्चुअल बायोलॉजी इनिशिएटिव" (Virtual Biology Initiative) का आगाज़ किया है। यह 5 साल का एक महत्वाकांक्षी प्रोग्राम है, जिसमें करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4200 करोड़ रुपये) का निवेश किया जाएगा। इसमें से 400 मिलियन डॉलर नई तकनीकों के विकास और 100 मिलियन डॉलर वैश्विक रिसर्च सहयोग पर खर्च होंगे। इस मिशन में एलन इंस्टीट्यूट और ब्रॉड इंस्टीट्यूट जैसे दुनिया के दिग्गज संस्थान भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।
कोशिकाओं का 'डिजिटल मॉडल' क्यों है जरूरी? इंसानी शरीर खरबों कोशिकाओं से बना है, जो हर पल बदलती रहती हैं। वैज्ञानिकों का लक्ष्य एक ऐसा AI मॉडल बनाना है जो यह बता सके कि कोई विशेष कोशिका किसी बीमारी या दवा के संपर्क में आने पर कैसा व्यवहार करेगी।
सटीक अनुमान: AI डेटा के जरिए पैटर्न पहचानेगा कि सेल कब और क्यों बीमार पड़ते हैं।
समय की बचत: लैब में हफ्तों चलने वाले प्रयोग अब कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए मिनटों में हो सकेंगे।
कम लागत: रिसर्च पर होने वाला अरबों का खर्च कम होगा, जिससे इलाज सस्ता हो सकता है।
डेटा की कमी: मिशन के सामने सबसे बड़ी दीवार किसी भी AI को सटीक बनाने के लिए विशाल और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा की जरूरत होती है। बायोलॉजी में यह सबसे बड़ी चुनौती है। चान जुकरबर्ग बायोहब ने सिंगल-सेल डेटा का बड़ा संग्रह तो बनाया है, लेकिन वह अभी पर्याप्त नहीं है। इसीलिए यह इनिशिएटिव अब ऐसी एडवांस इमेजिंग तकनीकों पर काम कर रहा है, जो एक साथ लाखों सेल्स के व्यवहार को बारीकी से ट्रैक कर सकें।
बायोटेक सेक्टर में उतरीं दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां इंसानी शरीर को समझने की इस रेस में सिर्फ जुकरबर्ग ही नहीं, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री शामिल है:
Nvidia: बड़े डेटा को प्रोसेस करने के लिए सुपर-कंप्यूटिंग पावर दे रही है।
Microsoft: जीनोमिक्स और मेडिकल रिसर्च के लिए एडवांस टूल्स बना रही है।
Isomorphic Labs: AI के जरिए नई और प्रभावी दवाइयों के फॉर्मूले तैयार करने में जुटी है।
क्या वाकई खत्म हो जाएंगी दुनिया की सारी बीमारियां? जुकरबर्ग का लक्ष्य सदी के अंत तक सभी बीमारियों को खत्म या नियंत्रित करना है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे एक चुनौतीपूर्ण और लंबी यात्रा मानते हैं। AI इलाज खोजने की प्रक्रिया को तेज जरूर कर सकता है और 'पर्सनलाइज्ड मेडिसिन' (मरीज के हिसाब से खास दवा) के युग की शुरुआत कर सकता है, लेकिन पूर्ण रूप से बीमारियों का खात्मा अभी भी एक वैज्ञानिक भविष्य की कल्पना है।