CJI की 'कॉकरोच' टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर मची 'कॉकरोच जनता पार्टी' की धूम, ट्रेडमार्क के लिए मची होड़

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India News Live,Digital Desk : मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (Cockroach Janta Party) को एक डिजिटल राजनीतिक आंदोलन में तब्दील कर दिया है। व्यंग्य (Satire) के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन अब इतना लोकप्रिय हो चुका है कि इसके नाम पर अब कानूनी दावेदारी यानी ट्रेडमार्क हासिल करने की होड़ मच गई है।

क्या है पूरा विवाद?

यह सारा बखेड़ा तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने समाज के कुछ वर्गों, विशेषकर बेरोजगार युवाओं पर एक तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा था कि समाज में कुछ लोग 'परजीवी' की तरह हैं और सिस्टम पर हमला करते हैं, जिनमें से कुछ "कॉकरोच की तरह हैं जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता।" इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर युवाओं को लामबंद कर दिया, जिसके बाद 16 मई 2026 को अभिजीत दीपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से डिजिटल मंच की शुरुआत की।

ट्रेडमार्क के लिए लगी दौड़

इस पार्टी की लोकप्रियता का आलम यह है कि इसके आधिकारिक पंजीकरण से पहले ही इस नाम को हथियाने के लिए लोग दौड़ पड़े हैं। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम के ट्रेडमार्क के लिए अब तक दो आवेदन दायर किए जा चुके हैं:

आवेदक 1: अजीम आदमभाई जाम (आवेदन संख्या: 7737037)

आवेदक 2: अखंड स्वरूप (आवेदन संख्या: 7741481)

हैरानी की बात यह है कि इस आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अभी तक ट्रेडमार्क के लिए कोई आवेदन नहीं किया है, जबकि अन्य लोग इस ब्रांड नाम को हासिल करने में जुट गए हैं।

'कॉकरोच इज बैक' - डिजिटल युद्ध जारी

पार्टी का शुरुआती 'एक्स' (X) अकाउंट प्रतिबंधित होने के बावजूद इसका असर कम नहीं हुआ है। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने तुरंत 'कॉकरोच इज बैक' नाम से नया हैंडल बना लिया, जिसके फॉलोअर्स चंद घंटों में ही 40,000 के पार पहुंच गए। दीपके का मानना है कि इस तरह की पाबंदियां केवल इस आंदोलन को और मजबूती दे रही हैं।

कौन हैं अभिजीत दीपके?

30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले हैं। वे बोस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं और पहले आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी यह 'डिजिटल पार्टी' अब बेरोजगारी, व्यवस्थागत पारदर्शिता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को एक व्यंग्यात्मक और आधुनिक अंदाज में पेश कर रही है, जो युवा वर्ग को काफी आकर्षित कर रहा है।

भले ही चुनाव आयोग की नजर में यह एक वास्तविक राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर 'मीम पॉलिटिक्स' (Meme Politics) के जरिए इसने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक भारत का युवा अपनी आवाज उठाने के लिए किसी भी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकता है।