महंगी चिप्स और बढ़ती कीमतों का बड़ा झटका! एप्पल ने iPhone 18 Pro के ऑर्डर्स में 15% की भारी कटौती की
वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में प्रीमियम सेगमेंट की अगुवाई करने वाली दिग्गज टेक कंपनी एप्पल (Apple) को लेकर सप्लाई चेन से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सप्लाई चेन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एप्पल ने अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के कंपोनेंट ऑर्डर्स में कम से कम 15 से 20 प्रतिशत तक की कटौती करने का निर्देश दिया है। सप्लाई चेन के विश्लेषकों का कहना है कि यह कटौती सीधे तौर पर सेमीकंडक्टर बाजार में एडवांस चिप्स और हाई-स्पीड मेमोरी की बढ़ती कीमतों के अलावा प्रीमियम सेगमेंट में धीमी उपभोक्ता मांग का परिणाम है। हार्डवेयर उत्पादन के पीक सीजन में एप्पल द्वारा ऑर्डर्स कम किए जाने के फैसले ने टेक जगत के साथ-साथ वॉल स्ट्रीट और सप्लायर कंपनियों के होश उड़ा दिए हैं।
महंगी चिप्स और AI हार्डवेयर: उत्पादन लागत में अप्रत्याशित उछाल
एप्पल के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप्स की आसमान छूती लागत है। आधुनिक जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Generative AI) और ऑन-डिवाइस इंटेलिजेंस फीचर्स को संभालने के लिए स्मार्टफोन निर्माताओं को अत्याधुनिक 2-नैनोमीटर आर्किटेक्चर वाले प्रोसेसर और भारी क्षमता वाली हाई-स्पीड LPDDR5X/LPDDR6 रैम की आवश्यकता पड़ रही है। दुनिया भर के डेटा सेंटर्स और AI सर्वर बूम के चलते एडवांस मेमोरी चिप्स की मांग पहले से ही चरम पर है, जिसके कारण सेमीकंडक्टर फाउंड्रीज और चिप निर्माताओं ने इनके दाम काफी बढ़ा दिए हैं। एप्पल अब तक इस बढ़ी हुई लागत का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मार्जिन पर पड़ते भारी दबाव के चलते कंपनी को अपनी उत्पादन रणनीति में संतुलन साधने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
कीमतों में बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं का सतर्क रुख
चिप्स और कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत का असर सीधे तौर पर फोन की रिटेल कीमतों पर भी पड़ा है। iPhone 18 Pro सीरीज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगभग 100 डॉलर की शुरुआती मूल्य वृद्धि के साथ उतारा गया था, जिसके चलते बेस मॉडल की कीमत 1,199 डॉलर और प्रो मैक्स की कीमत 1,299 डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय बाजार में भी प्रो मॉडल्स की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। इस भारी-भरकम कीमत ने आम उपभोक्ताओं और टेक प्रेमियों दोनों को अपग्रेड करने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर कर दिया है। पिछले कुछ जेनरेशन से आईफोन इस्तेमाल कर रहे कई यूजर्स का मानना है कि पुराने मॉडल्स भी रोजमर्रा के काम और AI टास्क बेहतरीन तरीके से संभाल लेते हैं, इसलिए केवल मामूली अपग्रेड के लिए भारी रकम खर्च करना समझदारी नहीं लग रहा। इसी हिचकिचाहट के चलते प्रीमियम मॉडल्स की शुरुआती बिक्री की रफ्तार उम्मीद से धीमी रही है।
सप्लाई चेन कंपनियों और टेक शेयर बाजार में खलबली
एप्पल द्वारा 15 प्रतिशत ऑर्डर घटाने की खबर फैलते ही ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़े दिग्गजों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC), फॉक्सकॉन, स्काईवर्क्स और क्वालकॉम जैसी चिप और असेंबली पार्टनर कंपनियों के राजस्व अनुमानों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि कुछ उद्योग जानकारों का यह भी तर्क है कि कम वॉल्यूम के बावजूद एप्पल के कुल रेवेन्यू पर तुरंत गहरा संकट नहीं आएगा, क्योंकि प्रति फोन 10 प्रतिशत ज्यादा कीमत होने से कंपनी अपने ओवरऑल मुनाफे को आंशिक रूप से संतुलित कर सकती है। इसके अलावा कंपनी का ध्यान आने वाले समय में अपने स्टैंडर्ड बेस मॉडल्स और आगामी स्लिम व फोल्डेबल फॉर्म-फैक्टर्स पर वॉल्यूम शिफ्ट करने की रणनीति पर भी केंद्रित हो सकता है।
क्या ग्राहकों के लिए बढ़ेगा वेटिंग पीरियड या गिरेंगी कीमतें?
सप्लाई चेन में 15 प्रतिशत की इस कटौती का सीधा प्रभाव आने वाले त्योहारी सीजन और हॉलिडे सेल के दौरान फोन की उपलब्धता पर पड़ सकता है। यदि एप्पल ने उत्पादन पहले ही सीमित कर दिया है, तो कुछ विशिष्ट रंगों और स्टोरेज वेरिएंट्स के लिए खरीदारों को लंबा वेटिंग पीरियड देखना पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, मांग को पुनर्जीवित करने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स बैंक ऑफर्स, नो-कॉस्ट ईएमआई और आकर्षक एक्सचेंज डिस्काउंट्स के जरिए खरीदारों को लुभाने की कोशिश कर सकते हैं। कुल मिलाकर, महंगी चिप्स की चुनौती ने यह साफ कर दिया है कि स्मार्टफोन इंडस्ट्री की सबसे ताकतवर कंपनी भी ग्लोबल सेमीकंडक्टर महंगाई और घटती उपभोक्ता क्रय शक्ति के दबाव से अछूती नहीं है।