'कश्मीरियत' पर छिड़ा महासंग्राम: POK के 'कठपुतली PM' ने शहबाज शरीफ के मंत्री के खिलाफ खोला मोर्चा
मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में इन दिनों पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है. यह नया और बड़ा विवाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) के एक विवादित बयान के बाद शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने पीओके के नागरिकों की पहचान पर सवाल उठाए थे. इस बयान से भड़के पीओके के तथाकथित (कठपुतली) प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर (Faisal Mumtaz Rathore) ने पाकिस्तानी मंत्री के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है. राठौर ने दो-टूक शब्दों में कहा कि कश्मीरियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए पाकिस्तान के किसी नेता या मंत्री के 'सर्टिफिकेट' (प्रमाण पत्र) की जरूरत नहीं है.
क्या था शहबाज के मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़बोला बयान?
हाल ही में एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि पीओके के रावलकोट (Rawalakot) और मीरपुर (Mirpur) इलाकों में रहने वाले लोग 'असली कश्मीरी' नहीं हैं.
इस बयान के सामने आते ही पूरे पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. स्थानीय लोगों और नेताओं ने इसे कश्मीरियों के गौरव और उनकी पहचान पर सीधा हमला करार दिया.
'पुराने दौर के नेता समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं' — फैसल राठौर
शुक्रवार को इस विवाद में कूदते हुए पीओके के कथित पीएम फैसल मुमताज राठौर ने शहबाज शरीफ के मंत्री पर तीखा हमला बोला. सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए उन्होंने ख्वाजा आसिफ को 'बूमर' (पुराने दौर का रूढ़िवादी नेता) बताते हुए कहा:
"जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ या इस्लामाबाद के किसी अन्य नेता की मान्यता की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं है. उनके जैसे पुराने दौर के नेता (बूमर्स) और उनकी यह विभाजनकारी हरकतें लोगों को करीब लाने की बजाय समाज और कश्मीरी समुदाय के भीतर गहरी दरार पैदा कर रही हैं."
माफी मांगने की बजाय कुशासन पर दी सफाई, राठौर बोले— 'बली का बकरा मत बनाओ'
चौतरफा घिरने के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की और अपनी सफाई पेश की. उन्होंने यू-टर्न लेते हुए कहा कि किसी कश्मीरी की पहचान केवल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) से तय नहीं होती, बल्कि यह उनके वर्षों के संघर्ष से तय होती है. हालांकि, अपनी इस सफाई के साथ ही उन्होंने पीओके प्रशासन (राठौर सरकार) के कामकाज और कुशासन पर भी उंगली उठा दी.
इस पर पलटवार करते हुए फैसल मुमताज राठौर ने कहा, "आसिफ, अपने असली बयान को छिपाने के लिए हमारे शासन को बली का बकरा बनाने की कोशिश मत कीजिए. अगर आपको हमारे काम का ट्रैक रिकॉर्ड जानना है, तो अपने वरिष्ठ अधिकारियों (पाकिस्तानी सेना/आईएसआई) से पूछिए, वह आपको बताएंगे कि हमने कितना शानदार शासन किया है. आपके लिए अधिक सम्मानजनक और गरिमामयी कदम यह होगा कि आप अपनी इस बदजुबानी के लिए कश्मीरियों से बिना शर्त माफी मांगें."
विशेषज्ञों की राय: 'आजाद कश्मीर' का कड़वा सच
सामरिक और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद पाकिस्तान के उस दोहरे चेहरे को उजागर करता है जिसे वह दुनिया के सामने छिपाने की कोशिश करता है:
दो हिस्सों में विभाजन: पाकिस्तान ने प्रशासनिक सुविधा के लिए पीओके को दो हिस्सों में बांट रखा है— एक को वह तथाकथित 'आजाद कश्मीर' कहता है और दूसरे को 'गिलगित-बाल्टिस्तान'.
कठपुतली सरकार का सच: दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान ने मुजफ्फराबाद में एक प्रधानमंत्री और सरकार की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन हकीकत यह है कि इस पूरे क्षेत्र की कमान रावलपिंडी (पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय) और इस्लामाबाद के हाथ में होती है. चुनाव सिर्फ एक औपचारिकता होते हैं और गद्दी पर कौन बैठेगा, यह पाकिस्तानी सेना ही तय करती है. ऐसे में खुद कठपुतली सरकार के प्रमुख का पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के खिलाफ इस तरह खुलकर बोलना यह दर्शाता है कि अंदरूनी असंतोष अब चरम पर पहुंच चुका है.