BREAKING:
July 19 2026 02:26 am

18 साल, 17 कप्तान और अब भी खाली हाथ: पंजाब किंग्स की अधूरी ख्वाहिश

Post

India News Live,Digital Desk : आईपीएल 2025 खत्म हो गया, लेकिन पंजाब किंग्स की कहानी एक बार फिर वही रह गई — अधूरी उम्मीदें और खाली हाथ लौटना। अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में टीम जीत के करीब तो पहुंची, लेकिन खिताब से चूक गई। आसीबी ने पंजाब को हराकर पहली बार ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया, और पंजाब 11 साल बाद फाइनल में आकर भी केवल निराशा समेट सका।

2008 में जब यह टीम ‘किंग्स इलेवन पंजाब’ के नाम से मैदान में उतरी थी, तब युवराज सिंह उसके पहले कप्तान थे। उन्होंने टीम को एक नई पहचान दी और सेमीफाइनल तक पहुंचाया। लेकिन उसके बाद शुरू हुआ कप्तानों का सिलसिला, जो 2025 तक पहुंचते-पहुंचते 17 नामों तक जा पहुंचा। फ्रेंचाइज़ी का नाम भले ही ‘पंजाब किंग्स’ हो गया, लेकिन किस्मत ने कभी साथ नहीं दिया।

महेला जयवर्धने, कुमार संगकारा, एडम गिलक्रिस्ट, डेविड मिलर, रविचंद्रन अश्विन, केएल राहुल और शिखर धवन जैसे दिग्गज भी टीम की किस्मत नहीं बदल सके। हां, अगर कोई नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, तो वह था जॉर्ज बेली — 2014 में पंजाब को पहली बार फाइनल तक पहुंचाने वाले कप्तान। उनकी शांति और रणनीतिक सोच ने टीम को टूर्नामेंट का सबसे खतरनाक दावेदार बना दिया था।

इसके बाद भी कई कप्तान आए, लेकिन पंजाब का सपना वहीं अटका रहा। केएल राहुल ने शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शन किया, कई रोमांचक मैच भी जीते, लेकिन टीम प्लेऑफ से आगे नहीं बढ़ पाई। बार-बार कप्तान बदलने का नुकसान टीम की एकता और भरोसे पर पड़ा।

अब बात करते हैं मौजूदा सीजन की — 2025। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पंजाब ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया। 14 मैचों में 9 जीत, और टीम सीधे फाइनल में। लेकिन किस्मत ने फिर साथ नहीं दिया। फाइनल में हार जरूर मिली, लेकिन अय्यर ने साबित कर दिया कि वे एक स्थिर और भरोसेमंद कप्तान हैं। पिछले साल उन्होंने केकेआर को 10 साल बाद खिताब दिलाया था और अब पंजाब को फाइनल में ले आए।

श्रेयस अय्यर ऐसे कप्तान बनते जा रहे हैं जिन पर भारत का भविष्य भी भरोसा कर सकता है। पिछले पांच सालों में तीन अलग-अलग टीमों को फाइनल तक पहुंचाने का रिकॉर्ड उनकी कप्तानी को खास बनाता है। अब पंजाब को जरूरत है एक स्थिर नेतृत्व की — और अय्यर इस भूमिका में पूरी तरह फिट बैठते हैं।

अगर टीम प्रबंधन अब किसी एक कप्तान पर लंबे समय तक भरोसा जताए, तो शायद अगले साल वही सपना पूरा हो जो 18 साल से अधूरा है — ट्रॉफी जीतने का।