सहारनपुर में मदरसों और मस्जिदों पर दर्ज हुए 11 मुकदमे, प्रशासन ने दिया 13 जुलाई का अल्टीमेटम
उत्तर प्रदेश में सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत सहारनपुर जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले के देवबंद तहसील सहित विभिन्न इलाकों में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए मदरसों, मस्जिदों और मजारों के खिलाफ प्रशासन ने एक साथ 11 मुकदमे दर्ज कर पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। प्रशासन की ओर से इन सभी अवैध निर्माणों के प्रबंधकों और मुतवल्लियों को कड़े कानूनी नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने दो टूक लहजे में साफ कर दिया है कि आगामी 13 जुलाई तक संतोषजनक और वैध दस्तावेज प्रस्तुत न करने की स्थिति में बुलडोजर ऐक्शन सहित बेदखली की एकपक्षीय विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दर्ज किए गए 11 मामलों में से छह मामलों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत कार्रवाई की जा रही है, जबकि तीन मामलों में सार्वजनिक संपत्ति संरक्षण (पीपी) एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण मामले विभिन्न स्थानीय न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
देवबंद तहसील बना कार्रवाई का मुख्य केंद्र: इन प्रसिद्ध मस्जिदों और मदरसों को थमाया गया नोटिस
अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में सहारनपुर की ऐतिहासिक देवबंद तहसील सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरी है, जहां सबसे ज्यादा छह अवैध धार्मिक परिसरों को सीधे तौर पर टारगेट किया गया है। राजस्व विभाग की पैमाइश और सरकारी अभिलेखों के मिलान के बाद तहसील प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
कार्रवाई के दायरे में आए प्रमुख संस्थानों की सूची जारी करते हुए प्रशासन ने बताया कि ग्राम सोहनचिड़ा की अक्सा मस्जिद, ग्राम पंडौली की मदीना मस्जिद, ग्राम छलौली स्थित मदरसा दारुस्सलाम, अंबेहटा शेखा स्थित मदरसा, पहाड़पुर की मस्जिद तथा अंबेहटा शेखा की ही एक अन्य मस्जिद के प्रबंधकों और मुतवल्लियों को नामजद नोटिस तामील कराए गए हैं। इन सभी पर राजस्व विभाग की टीम ने सरकारी चारागाह, बंजर या ग्राम समाज की कीमती जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्का निर्माण करने का गंभीर आरोप लगाया है।
13 जुलाई के बाद शुरू होगी बेदखली की विधिक प्रक्रिया: एकपक्षीय आदेश होगा जारी
सहारनपुर जिला प्रशासन ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों को अपनी बेगुनाही और जमीन के मालिकाना हक के सबूत पेश करने के लिए 13 जुलाई तक का अंतिम समय दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई वैध जवाब या जमीन के मूल दस्तावेज पेश नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित न्यायालयों द्वारा एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जाएगा।
आपको बता दें कि सहारनपुर के इन संवेदनशील इलाकों में इससे पहले भी एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और स्थानीय खुफिया एजेंसियों द्वारा कई संदिग्ध मकतबों और मदरसों की फंडिंग व उनके दस्तावेजों की सघन जांच की जा चुकी है। हालांकि, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में की जा रही यह बड़ी कार्रवाई पूरी तरह से शुद्ध राजस्व अभिलेखों, जमीनी पैमाइश और सरकारी भूमि की सुरक्षा के आधार पर की जा रही है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सार्वजनिक संपत्ति को भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराना है।
सरकारी जमीन पर कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं: जिला मजिस्ट्रेट अरविंद चौहान की दो टूक
इस पूरे मामले पर सहारनपुर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) अरविंद चौहान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कड़ा संदेश जारी किया है। डीएम अरविंद चौहान ने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के तहत सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी संस्थान का क्यों न हो। सभी मामलों में पूरी तरह नियमानुसार और विधिक प्रक्रिया के तहत ही नोटिस जारी किए गए हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि संबंधित पक्षों को कानून के दायरे में रहकर अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा व निष्पक्ष अवसर दिया जा रहा है। लेकिन यदि 13 जुलाई की तय समय सीमा तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई संतोषजनक विधिक जवाब नहीं मिलता है, तो जिला प्रशासन बिना किसी देरी के कानून के अनुसार एकपक्षीय ध्वस्तीकरण और बेदखली की सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।