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September 26 2026 07:16 pm

कृषि से आवासीय भू-उपयोग बदलवाने वालों को बड़ी राहत: योगी सरकार ने शुल्क में की भारी कटौती

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उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट, टाउनशिप विकास, उद्योग स्थापना और निजी आवास निर्माण की दिशा में योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश में जमीन का लैंड यूज (भू-उपयोग) बदलवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और भारी-भरकम शुल्क चुकाने की बाध्यता से आम नागरिकों, किसानों और निवेशकों को बड़ी राहत दे दी गई है। राज्य सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क (Land-Use Conversion Fee) की दरों में करीब 50 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी है। इसके साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और फाइलों की पेंडेंसी खत्म करने के उद्देश्य से विकास प्राधिकरणों को स्थानीय स्तर पर ही निर्णय लेने के व्यापक अधिकार सौंप दिए गए हैं। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा जारी शासनादेश के बाद अब पूरे प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर और औद्योगिक गलियारों में नई जान फूंकने की तैयारी है।

कृषि से आवासीय व अन्य श्रेणियों के शुल्क में करीब 50 फीसदी तक की छूट

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली में संशोधन करते हुए सरकार ने नई शुल्क संरचना तय की है। पहले जहां कृषि भूमि को आवासीय में बदलने के लिए सर्किल रेट का 50 फीसदी शुल्क अदा करना पड़ता था, उसे अब घटाकर आधा यानी मात्र 25 फीसदी कर दिया गया है। इसी प्रकार वाणिज्यिक (कमर्शियल) परिवर्तन शुल्क को 150 प्रतिशत से घटाकर सीधे 75 प्रतिशत पर ला दिया गया है। कार्यालय उपयोग (इंस्टीट्यूशनल) के लिए दर 100 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत और मिश्रित भू-उपयोग (मिक्स्ड यूज) के लिए शुल्क 125 प्रतिशत से घटाकर 65 प्रतिशत तय कर दिया गया है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कृषि से लघु व वृहद उद्योग लगाने पर शुल्क मात्र 15 फीसदी रखा गया है।

आवासीय से सार्वजनिक सुविधा, यातायात और पार्किंग के कार्यों के लिए भू-उपयोग परिवर्तन को पूरी तरह से नि:शुल्क कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस क्रांतिकारी कदम से निजी मकान बनाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के निर्माण खर्च में सीधी कमी आएगी और टाउनशिप विकसित करने वाले बिल्डरों की परियोजना लागत भी तेजी से घटेगी।

विकास प्राधिकरणों को 6,000 वर्ग मीटर तक सीधे मंजूरी देने का मिला अधिकार

अब तक प्रदेश के महायोजना (मास्टर प्लान) या क्षेत्रीय विकास योजना के तहत आने वाली किसी भी भूमि का भू-उपयोग बदलने के लिए शासन स्तर और कैबिनेट से मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिसमें महीनों और वर्षों का लंबा समय बर्बाद हो जाता था। सरकार ने लालफीताशाही पर कड़ा प्रहार करते हुए अब 6,000 वर्ग मीटर तक की भूमि का भू-उपयोग बदलने का संपूर्ण अधिकार संबंधित स्थानीय विकास प्राधिकरणों (जैसे एलडीए, केडीए, जीडीए, नोएडा आदि) को ही सौंप दिया है।

विकास प्राधिकरण अपने मास्टर प्लान में प्रत्येक भू-उपयोग विशेष के कुल क्षेत्रफल का अधिकतम एक प्रतिशत तक स्थानीय स्तर पर ही बदल सकेंगे। एक प्रतिशत से अधिक के प्रस्ताव होने पर ही फाइल शासन के पास अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी। इस विकेंद्रीकरण से गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा), लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और आगरा जैसे बड़े शहरी केंद्रों में नक्शा पास कराने और प्रोजेक्ट शुरू करने की प्रक्रिया कई गुना तेज हो जाएगी।

तय समय-सीमा और पारदर्शी प्रक्रिया का खाका तैयार

नई व्यवस्था को पूरी तरह समयबद्ध (Time-bound) और पारदर्शी बनाया गया है। आवेदक को प्रति हेक्टेयर मात्र 1,000 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद विकास प्राधिकरण और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक विभाग को संयुक्त रूप से 22 दिनों के भीतर अपनी संस्तुतियां देनी होंगी। प्राधिकरण बोर्ड से मंजूरी के बाद 15 दिनों के भीतर अखबारों और वेबसाइट पर सार्वजनिक आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे।

यदि कोई विधिक आपत्ति दर्ज नहीं होती है, तो विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष के स्तर से 15 दिनों में शुल्क जमा करने की नोटिस जारी होगी। आवेदक को शुल्क जमा करने के लिए 90 दिनों की मोहलत मिलेगी और पैसा जमा होते ही 15 दिनों के भीतर भू-उपयोग परिवर्तन का औपचारिक प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। पूरी गणना टेलिस्कोपिक आधार पर पारदर्शी तरीके से की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या मनमानी की गुंजाइश न बचे।

ग्रीन बेल्ट और जलाशयों के भू-उपयोग पर रहेगा सख्त प्रतिबंध

शासनादेश में यह भी कड़ा प्रावधान किया गया है कि विकास की रफ्तार के बीच पर्यावरणीय संतुलन और सार्वजनिक सुविधाओं से कोई समझौता नहीं होगा। हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट), वन भूमि, मनोरंजन पार्क, खेल मैदान, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), श्मशान, कब्रिस्तान, रेलवे भूमि, जल निकासी वाले नाले और पारंपरिक तालाबों व पोखरों का भू-उपयोग किसी भी सूरत में नहीं बदला जाएगा।

योगी सरकार के इस बड़े सुधार से न केवल प्रदेश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और व्यवस्थित शहरीकरण को नई उड़ान मिलेगी, बल्कि आम आदमी के लिए अपने आशियाने का सपना पूरा करना पहले से कहीं ज्यादा सुगम और किफायती साबित होगा।