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September 26 2026 06:53 pm

यूपी चुनाव का सबसे ताजा सर्वे: भाजपा गठबंधन को 267 सीटों के साथ बंपर बहुमत का अनुमान

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उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी सहित सभी प्रमुख दल चुनावी समीकरण साधने और मतदाताओं को अपने पाले में खींचने के लिए रैलियों, संगठनात्मक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति का मिजाज भांपने के लिए किया गया सबसे ताजा और व्यापक चुनावी सर्वे सामने आ गया है। 'न्यूज लीडर' और 'मैटराइज' (Matrize) द्वारा संयुक्त रूप से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर किए गए इस ओपिनियन पोल ने राज्य के भावी राजनीतिक परिदृश्य की एक स्पष्ट और चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी गठबंधन एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में ऐतिहासिक वापसी करता हुआ दिखाई दे रहा है।

भाजपा गठबंधन को 267 सीटों का अनुमान, सपा गठबंधन 132 पर सिमटा

सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, यदि आज उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होते हैं तो 403 सदस्यीय सदन में भाजपा नीत एनडीए (NDA) गठबंधन को 267 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल हो सकती है। यह आंकड़ा बहुमत के जादुई आंकड़े (202 सीट) से काफी आगे है। इसमें अकेले भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर 246 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है। वहीं एनडीए के घटक दलों में अपना दल (एस) को 9 सीटें, निषाद पार्टी को 4 सीटें, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को 3 सीटें और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को 1 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है।

दूसरी ओर, सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिशों में जुटी अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन (सपा-कांग्रेस) को सर्वे में 132 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। इस गठबंधन में अकेले समाजवादी पार्टी 125 सीटों पर परचम लहरा सकती है, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी महज 7 सीटों पर सिमटती दिख रही है। कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज रही मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए सर्वे बेहद निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है, जहां पार्टी को मात्र 2 सीटें मिलने की संभावना है। अन्य व निर्दलीय प्रत्याशियों के खाते में भी केवल 2 सीटें जाने का अनुमान लगाया गया है।

वोट शेयर में 6 फीसदी का भारी अंतर, भाजपा को 44 तो सपा को 38 फीसदी

चुनावी राजनीति में सीटों के साथ-साथ मत प्रतिशत (वोट शेयर) को जनसमर्थन का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। मैटराइज के ताजा सर्वे के अनुसार, भाजपा गठबंधन को उत्तर प्रदेश में 44 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है। वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को 38 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन हासिल होता दिख रहा है। दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच मत प्रतिशत का यह 6 फीसदी का अंतर बेहद निर्णायक साबित हो रहा है, जो सीटों के बड़े अंतर में तब्दील हो रहा है।

सर्वे में बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक में भारी बिखराव का संकेत मिला है, जहां पार्टी का वोट शेयर गिरकर महज 0.8 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, अन्य छोटे दलों, क्षेत्रीय मोर्चों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में करीब 10 प्रतिशत वोट शेयर जाने की संभावना जताई गई है।

बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में एनडीए का दबदबा कायम

क्षेत्रवार स्थिति का विश्लेषण करें तो अवध और बुंदेलखंड के इलाकों में भाजपा गठबंधन को भारी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। बुंदेलखंड की 19 विधानसभा सीटों में से भाजपा गठबंधन 17 सीटों पर कब्जा जमाता दिख रहा है, जबकि सपा गठबंधन के खाते में केवल 2 सीटें जाने का अनुमान है। इसी प्रकार अवध क्षेत्र की 118 सीटों में से भाजपा गठबंधन 77 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सपा गठबंधन 40 सीटों और बसपा मात्र 1 सीट पर सिमटती दिख रही है।

जिलों की बात करें तो राजधानी लखनऊ की सभी 9 सीटों पर भाजपा की क्लीन स्वीप का अनुमान है, जहां सपा का खाता खुलना मुश्किल दिख रहा है। इसके अलावा उन्नाव की 6 सीटें, हरदोई की 8 सीटें और झांसी की सभी 4 सीटें भाजपा गठबंधन के पाले में जाती दिख रही हैं। वहीं कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले रायबरेली में सपा गठबंधन को 5 और भाजपा को 1 सीट मिलने की संभावना जताई गई है। लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बहराइच में भी भाजपा गठबंधन विपक्ष पर भारी पड़ता दिख रहा है।

पिछले चुनावों से तुलना: क्या कहता है राजनीतिक इतिहास

यदि पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो 2022 के चुनाव में भाजपा ने अकेले 255 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 41.3 प्रतिशत रहा था, जबकि सहयोगी दलों (अपना दल एस और निषाद पार्टी) को मिलाकर गठबंधन 273 सीटों तक पहुंचा था। उस चुनाव में सपा ने 111 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 32.1 फीसदी था।

ताजा सर्वे के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा अपने कोर वोट बैंक और प्रदर्शन को मजबूती से बरकरार रखे हुए है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच हालिया दिनों में सीटों व बयानों को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान का असर भी जमीनी समीकरणों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जनता के मूड का एक प्रारंभिक अनुमान है और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, टिकट बंटवारे, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के चयन से मुकाबले में और तीखापन देखने को मिल सकता है।