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September 02 2026 09:15 pm

'टॉक्सिक' को मिली सिर्फ 0.5 स्टार रेटिंग तो भड़क उठे यश के फैंस: महेश बाबू के 20 साल के बेटे गौतम के रिव्यू पर मचा भारी बवाल

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कन्नड़ सिनेमा के 'रॉकिंग स्टार' यश की बहुप्रतीक्षित और महा-बजट एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' (Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups) को लेकर सिनेमाघरों से लेकर इंटरनेट तक घमासान मचा हुआ है। बॉक्स ऑफिस पर वीकडेज में कमाई की सुस्त रफ्तार और 51 साल पुराने रिकॉर्ड्स के बीच पिस रही इस फिल्म के इर्द-गिर्द अब एक नया और हाई-वोल्टेज विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की धुरी बने हैं तेलुगु सिनेमा के 'प्रिंस' कहे जाने वाले सुपरस्टार महेश बाबू के 20 वर्षीय बेटे गौतम घट्टामनेनी। हाल ही में सिनेप्रेमियों और नेटिजन्स द्वारा गौतम का कथित 'लेटरबॉक्सड' (Letterboxd - एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म रेटिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) अकाउंट खोज निकाले जाने के बाद सोशल मीडिया पर तूफान आ गया है।

इस प्रोफाइल पर गौतम द्वारा यश की फिल्म 'टॉक्सिक' को 5 में से महज '0.5 स्टार' (आधा स्टार) की सबसे निचली रेटिंग दी गई थी। जैसे ही इस रिव्यू और रेटिंग का स्क्रीनशॉट एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ, यश के वफादार प्रशंसकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। यश के फैंस ने इसे जानबूझकर की गई 'हेट-रेटिंग' और कन्नड़ सुपरस्टार की साख गिराने की सोची-समझी साजिश करार देते हुए गौतम घट्टामनेनी को बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह मामला कन्नड़ और तेलुगु सिनेमा प्रेमियों के बीच एक बड़ी 'फैन-वॉर' में तब्दील हो गया।

400 से ज्यादा फिल्मों के शौकीन हैं गौतम: लेटरबॉक्सड पर क्यों दी 'टॉक्सिक' को आधी स्टार रेटिंग?

गौतम घट्टामनेनी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सिनेमा के गंभीर विश्लेषक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी वायरल हुई लेटरबॉक्सड प्रोफाइल के अनुसार, वे विभिन्न भारतीय भाषाओं (तेलुगु, हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम) और विश्व सिनेमा की 400 से अधिक फिल्में देख चुके हैं और उन पर अपनी स्वतंत्र राय दर्ज करते हैं। उनकी प्रोफाइल बायो में साफ लिखा है—"मेरी राय पूरी तरह मेरी अपनी है, यह इतनी गंभीर बात नहीं है"।

26 अगस्त को रिलीज हुई गीतू मोहनदास निर्देशित फिल्म 'टॉक्सिक' को गौतम ने रिलीज के तुरंत बाद देखा और इसे 5 में से केवल आधा स्टार (0.5) दिया। आलोचकों और फिल्म समीक्षकों का मानना है कि फिल्म के जरूरत से ज्यादा लंबे 3 घंटे 14 मिनट के रनटाइम, अत्यधिक रक्तरंजित हिंसा, डार्क टोन और भटके हुए स्क्रीनप्ले के चलते कई गंभीर सिनेप्रेमियों को यह फिल्म रास नहीं आई है। गौतम, जो एक दर्शक और सिनेमाई छात्र के रूप में फिल्मों का तकनीकी व कथात्मक मूल्यांकन करते हैं, उन्होंने भी शायद इसी आधार पर फिल्म को सबसे निचली रेटिंग में रखा। लेकिन एक सुपरस्टार के बेटे की ओर से इतने बड़े प्रोजेक्ट को सीधे 0.5 स्टार थमा देना इंटरनेट पर यश के प्रशंसकों को कतई बर्दाश्त नहीं हुआ।

पिता की फिल्मों को भी नहीं बख्शा: 'ब्रह्मोत्सवम' को 1 और 'पोकिरी' को दिए हैं 5 स्टार

सोशल मीडिया पर जब यश के समर्थकों ने गौतम पर पक्षपाती होने और यश के प्रति दुर्भावना रखने का आरोप लगाया, तो तुरंत महेश बाबू के प्रशंसकों और निष्पक्ष इंटरनेट यूजर्स ने गौतम के बचाव में उनके पुराने रिव्यू और रेटिंग्स के सबूत सामने रख दिए। सामने आए आंकड़ों से पता चला कि गौतम किसी स्टार या व्यक्ति विशेष से प्रभावित होकर रेटिंग नहीं देते, बल्कि वे अपने खुद के पिता सुपरस्टार महेश बाबू की फिल्मों का भी उतनी ही क्रूरता से पोस्टमार्टम करते हैं।

गौतम की प्रोफाइल के अनुसार:

उन्होंने अपने पिता महेश बाबू की आइकॉनिक ब्लॉकबस्टर 'पोकिरी' (Pokiri) और लीक से हटकर बनी साइकोलॉजिकल थ्रिलर '1: नेनोक्काडाइन' (1: Nenokkadine) को पूरे 5 में से 5 स्टार दिए हैं।

वहीं पिता की फ्लॉप पारिवारिक ड्रामा 'ब्रह्मोत्सवम' (Brahmotsavam) को उन्होंने बिना किसी संकोच के सिर्फ 1 स्टार दिया था।

महेश बाबू की पुरानी फिल्मों 'निजम' (Nijam) और 'वामसी' (Vamsi) को भी उन्होंने केवल 2-2 स्टार ही दिए हैं।

उपयोगकर्ताओं ने तर्क दिया कि जो लड़का अपने खुद के सुपरस्टार पिता की कमजोर फिल्मों को 1 स्टार देने से नहीं हिचकिचाता, वह भला किसी अन्य स्टार के प्रति पक्षपाती कैसे हो सकता है?

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गौतम के सिनेमाई टेस्ट को लेकर जब गहरी पड़ताल की गई, तो यह बात भी साफ हुई कि 'टॉक्सिक' अकेली ऐसी बड़ी फिल्म नहीं है जिसे उन्होंने 0.5 स्टार दिया हो। इससे पहले विजय देवरकोंडा और करण जौहर की बहुचर्चित पैन-इंडिया फिल्म 'लाइगर' (Liger) को भी गौतम ने 0.5 स्टार की ही रेटिंग दी थी। वहीं प्रभास की मेगा-बजट माइथोलॉजिकल फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' (Kalki 2898 AD) को उन्होंने औसत 2.5 स्टार रेटिंग दी थी।

दूसरी तरफ, जब अच्छी और कसी हुई पटकथा वाली फिल्मों की बात आती है, तो गौतम दिल खोलकर सराहना करते हैं। उन्होंने रमेश सिप्पी की कालजयी फिल्म 'शोले', हॉलीवुड की 'नाइव्स आउट', नानी की 'जर्सी' और एस.एस. राजामौली की 'बाहुबली 2' को पूरे 5 में से 5 स्टार दिए हैं। इसके अलावा आदित्य धर की आगामी एक्शन फ्रेंचाइजी 'धुरंधर 1' को 4 स्टार, लोकेश कनकराज की फिल्म को 4 स्टार और दुलकर सलमान की 'सीता रामम' को 4.5 स्टार से नवाजा है।

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इस विवाद के भड़कने और भारी आलोचना के बाद बताया जा रहा है कि गौतम की प्रोफाइल से 'टॉक्सिक' की वह विशिष्ट रेटिंग या तो छिपा दी गई है या हटा ली गई है। लेकिन इस घटना ने इंटरनेट और सिनेमाई बिरादरी में एक बहुत बड़ी बहस छेड़ दी है। एक तरफ यश के कुछ अति-उत्साही फैंस का कहना है कि एक बड़े फिल्मी घराने से आने वाले स्टार किड को सार्वजनिक रूप से किसी समकालीन सुपरस्टार की फिल्म को इस तरह नीचा दिखाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे फिल्म के कारोबार और दर्शकों की धारणा पर गलत असर पड़ता है।

वहीं दूसरी तरफ, बुद्धिजीवी वर्ग और अधिकांश स्वतंत्र यूजर्स गौतम के समर्थन में खड़े हैं। उनका कहना है कि लेटरबॉक्सड एक निजी डायरी और फिल्म लॉगिंग प्लेटफॉर्म है, जहां हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद या नापसंद को बिना किसी डिप्लोमेसी के दर्ज कर सके। यह तथ्य कि गौतम ने अपने पिता की खराब फिल्मों को भी रियायत नहीं दी, यह साबित करता है कि वे एक सच्चे और ईमानदार फिल्म प्रेमी हैं। यह विवाद एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को दर्शाता है कि भारत में स्टारडम और फैन-क्लब संस्कृति इतनी ज्यादा संवेदनशील हो चुकी है कि किसी स्टार किड की महज एक व्यक्तिगत 'आधा स्टार' की रेटिंग भी राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल जंग का रूप ले लेती है।