एक घंटे में पुतिन की दूसरी चेतावनी से सहमी दुनिया: क्या यूक्रेन जंग में होगी परमाणु हथियारों की एंट्री?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक भू-राजनीति बेहद नाजुक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा एक ही घंटे के अंतराल में पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) को दी गई दोहरी चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी खलबली मच गई है। पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि दुनिया इस समय एक बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही है और अगर पश्चिमी ताकतों ने युद्ध को और अधिक भड़काने या रूस की क्षेत्रीय संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की, तो मॉस्को अपने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा।
पुतिन ने आगाह किया कि आज प्रमुख वैश्विक शक्तियों के पास ऐसे घातक हथियार मौजूद हैं जो पूरी पृथ्वी को विनाश के कगार पर धकेल सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल कभी नहीं होगा, तो उन्होंने दो टूक कहा कि कोई भी इस बात की गारंटी नहीं दे सकता। इस बयान ने वाशिंगटन, लंदन और ब्रुसेल्स सहित सभी पश्चिमी राजधानियों में अलार्म बजा दिया है।
कलिनिनग्राद की घेराबंदी बनी विवाद की मुख्य वजह: नाटो को सीधी चेतावनी
पुतिन की इस ताजा आक्रामकता के केंद्र में रूस का रणनीतिक इलाका 'कलिनिनग्राद' (Kaliningrad) है। बाल्टिक सागर तट पर स्थित यह रूसी क्षेत्र मुख्य रूसी भूभाग से अलग है और चारों ओर से नाटो सदस्य देशों—पोलैंड और लिथुआनिया—से घिरा हुआ है। मॉस्को ने नाटो को एक कूटनीतिक पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि पश्चिमी गठबंधन बाल्टिक सागर में लगातार सैन्य अभ्यास कर रहा है और रूसी जहाजों को रोकने व कलिनिनग्राद की हवाई-समुद्री नाकेबंदी की साजिश रच रहा है।
पुतिन ने साफ लफ्जों में कहा कि अगर कलिनिनग्राद या रूस की मुख्य भूमि पर किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता दिखाई गई, तो रूस अपने पूरे शस्त्रागार (Full Arsenal) का इस्तेमाल करेगा। कलिनिनग्राद में रूस ने पहले से ही परमाणु क्षमता वाली इस्कंदर मिसाइलें तैनात कर रखी हैं, जो बर्लिन, वारसॉ और कोपेनहेगन जैसे प्रमुख यूरोपीय शहरों को कुछ ही मिनटों में निशाना बना सकती हैं।
रूस का 'कॉम्पिटिटिव एडवांटेज': नाटो से दोगुने आकार की लड़ाई का दावा
रूसी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि पारंपरिक सैन्य ताकत के मामले में नाटो रूस से दोगुना बड़ा गठबंधन है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि आधुनिक और विनाशकारी हथियारों के मामले में रूस के पास निर्णायक बढ़त है। पुतिन ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन भी परमाणु संपन्न देश हैं, लेकिन रूस के पास जिस श्रेणी की हाइपरसोनिक और रणनीतिक परमाणु प्रणालियां हैं, वैसी तकनीक दुनिया में किसी अन्य देश के पास नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन को पश्चिमी देशों द्वारा दी जा रही सैन्य सहायता और रूस के अंदरूनी हिस्सों पर लंबी दूरी के हमलों की तकनीक उपलब्ध कराने को सीधे तौर पर युद्ध में भागीदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की ओर से रूसी रिफाइनरियों और जहाजों पर किए गए हमलों का मॉस्को अब समान स्तर पर जवाब दे रहा है।
क्या सचमुच तीसरे विश्व युद्ध और परमाणु टकराव की ओर बढ़ रही दुनिया?
पुतिन के इस बयान के बाद नाटो और पश्चिमी देशों ने रूस पर परमाणु बयानबाजी (Nuclear Sabre-Rattling) के जरिए दुनिया को डराने का आरोप लगाया है। नाटो अधिकारियों का कहना है कि वे केवल अपनी सुरक्षा सीमा को मजबूत कर रहे हैं और कलिनिनग्राद के लिए कोई सीधा खतरा नहीं हैं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की हालिया न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन में किए गए बदलावों के बाद परमाणु हमले की सीमा (Nuclear Threshold) पहले से काफी घट गई है।
अब यदि कोई गैर-परमाणु देश किसी परमाणु शक्ति संपन्न देश के समर्थन से रूस पर बड़ा हमला करता है, तो रूस उसे परमाणु आक्रमण मानकर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। लगातार बढ़ते तनाव, ड्रोन हमलों और कूटनीतिक संवाद के अभाव के चलते विश्लेषक इसे शीत युद्ध के बाद का सबसे बड़ा परमाणु संकट मान रहे हैं।