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September 16 2026 02:57 pm

क्या कल रहेगा भद्रा का साया? जानिए वाहन, मशीनरी और सोना-चांदी की खरीदारी का सबसे शुभ मुहूर्त

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सृष्टि के प्रथम शिल्पकार, देवताओं के दिव्य वास्तुकार एवं इंजीनियरिंग व तकनीकी ज्ञान के अधिष्ठाता देव भगवान विश्वकर्मा की जयंती व पूजनोत्सव कल यानी गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को संपूर्ण देश में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू सौर पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष जब भगवान सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं (कन्या संक्रांति), उसी पावन तिथि को विश्वकर्मा पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कारखानों, औद्योगिक इकाइयों, गैराज, निर्माण स्थलों, दुकानों और घरों में औजारों, मशीनों, कंप्यूटरों और वाहनों की विशेष पूजा की जाती है।

शास्त्रों में किसी भी मांगलिक उत्सव या नए उपकरण व वाहन की खरीदारी से पहले 'भद्रा' का विचार करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि भद्रा काल में किया गया कोई भी शुभ कार्य या नया आरंभ बाधाओं से घिर सकता है। ऐसे में श्रद्धालुओं और व्यापारियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कल विश्वकर्मा पूजा पर भद्रा का प्रभाव रहेगा या नहीं? आइए जानते हैं कल की सटीक ज्योतिषीय स्थिति, पूजन समय और खरीदारी के सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त।

क्या कल विश्वकर्मा पूजा पर रहेगा भद्रा का साया?

वैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणनाओं के अनुसार, कल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पूरा दिन श्रद्धालुओं और व्यापार जगत के लिए राहत भरा रहेगा। कल दिन के अधिकांश शुभ कालखंड और कन्या संक्रांति के समय भद्रा का कोई अनिष्टकारी प्रभाव मुख्य पूजा पर नहीं रहेगा।

सप्तमी तिथि के विशिष्ट करणों के प्रभाव से बनने वाली भद्रा का वास स्वर्ग अथवा पाताल लोक में होने के कारण इसका नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी लोक के शुभ कार्यों पर निष्प्रभावी माना जाता है। शास्त्रों में नियम है कि जब भद्रा पृथ्वी लोक पर नहीं होती, तो उसका परिहार स्वतः हो जाता है। अतः श्रद्धालु व उद्योगपति बिना किसी भय या संकोच के अपने कार्यस्थलों पर यंत्र पूजन, ध्वजारोहण और नई मशीनरी का प्रतिष्ठापन कर सकते हैं। केवल दिन के सामान्य अशुभ काल यानी 'राहुकाल' का ध्यान रखना अनिवार्य होगा।

कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजन का महामुहूर्त

कल गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को सूर्य देव का कन्या राशि में प्रवेश प्रातः 07:58 बजे हो रहा है। संक्रांति काल के साथ ही विश्वकर्मा पूजा का मुख्य पुण्यकाल आरंभ हो जाएगा।

कन्या संक्रांति का क्षण: प्रातः 07:58 बजे

विश्वकर्मा पूजा का श्रेष्ठ अमृत मुहूर्त: प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 10:40 बजे तक

संक्रांति महापुण्य काल: प्रातः 07:58 बजे से दोपहर 02:15 बजे तक

दोपहर का अभिजित मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक (यह मुहूर्त सभी प्रकार के औजार पूजन, नए कार्य आरंभ और अनुबंधों पर हस्ताक्षर के लिए अत्यंत मंगलकारी है)

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:18 बजे से दोपहर 03:07 बजे तक

वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी खरीदारी का सबसे शुभ चौघड़िया

विश्वकर्मा पूजा का दिन नई कार, बाइक, व्यावसायिक वाहन, ट्रैक्टर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फैक्टरी मशीनरी, लोहा, तांबा और सोने-चांदी के आभूषण खरीदने के लिए साल के सबसे सिद्ध दिनों में से एक माना जाता है। यदि आप कल कोई बड़ा निवेश या वाहन क्रय करने जा रहे हैं, तो इन चौघड़िया मुहूर्तों का लाभ उठाएं:

शुभ चौघड़िया (प्रातः काल): प्रातः 06:07 बजे से 07:39 बजे तक (नया वाहन या गैजेट्स लेने हेतु उत्तम)

लाभ व अमृत चौघड़िया (दोपहर): दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक (व्यापारिक संपत्ति, फैक्टरी मशीनरी और सोने की खरीदारी के लिए सर्वश्रेष्ठ)

शुभ चौघड़िया (सायंकाल): सायं 04:50 बजे से 06:22 बजे तक (दुकान या शोरूम से डिलीवरी लेने हेतु अनुकूल)

कल का राहुकाल: इस समय भूलकर भी न करें खरीदारी या पूजा

ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ और विघ्नकारक समय माना जाता है। कल गुरुवार होने के कारण राहुकाल का समय दोपहर के उत्तरार्ध में रहेगा।

राहुकाल समय: दोपहर 01:47 बजे से दोपहर 03:19 बजे तक

विशेष सावधानी: इस समयावधि (दोपहर 01:47 से 03:19 बजे) के दौरान किसी भी नए वाहन की चाबी न लें, नई मशीन का स्विच ऑन न करें, न ही कोई बड़ा वित्तीय भुगतान करें। इस कालखंड को छोड़कर पूरे दिन निर्विघ्न रूप से खरीदारी और पूजन किया जा सकता है।

विश्वकर्मा पूजा की प्रामाणिक विधि और वास्तु नियम

कल प्रातः काल स्नान के उपरांत अपने कार्यस्थल, दुकान, गैराज या वर्कशॉप की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद सभी छोटे-बड़े औजारों, मशीनों, वाहनों और उपकरणों को गंगाजल से धोकर या पोंछकर पवित्र करें। इसके उपरांत भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र को उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा की चौकी पर पीले या लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें।

कलश स्थापना करके भगवान विश्वकर्मा को रोली, अक्षत, पीले पुष्प, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य (ऋतु फल, पेड़ा, लड्डू) अर्पित करें। अपने व्यापारिक औजारों और वाहनों पर रोली व हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और रक्षासूत्र (मौली) बांधें। इसके पश्चात 'ॐ आधार शक्तपे नमः' और 'ॐ कूमयि नमः' का ध्यान करते हुए मुख्य मंत्र "ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः" का 108 बार जप करें। अंत में आरती कर सभी कर्मचारियों, कारीगरों व परिवार में प्रसाद वितरण करें। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन अपने अधीनस्थ कारीगरों और श्रमिकों को उपहार व भोजन कराने से उद्योग और व्यापार में सालभर निरंतर बरकत बनी रहती है।