क्या तांबा फिर छुएगा रिकॉर्ड स्तर? युद्ध के साये और गिरती मांग के बीच फंसा कमोडिटी बाजार

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India News Live,Digital Desk : औद्योगिक विकास की रीढ़ माना जाने वाला 'लाल सोना' यानी तांबा (Copper) इन दिनों वैश्विक उतार-चढ़ाव के भंवर में फंसा हुआ है। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को हफ्ते के पहले दिन कमोडिटी बाजारों में तांबे की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। एक तरफ जहां साल की शुरुआत में तांबे ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ था, वहीं मध्य पूर्व (Middle East) में जारी अमेरिका-ईरान तनाव ने अब इसकी कीमतों पर दबाव बना दिया है।

बाजार का हाल: रिकॉर्ड स्तर से नीचे फिसला तांबा

आज वैश्विक बाजार 'कॉमेक्स' (COMEX) पर तांबे की कीमतें 1% गिरकर 6.0535 डॉलर प्रति पाउंड पर आ गईं। गौर करने वाली बात यह है कि इसी साल 29 जनवरी को तांबे ने अपना सर्वकालिक उच्चतम स्तर (All-time High) छुआ था।

लंदन मेटल एक्सचेंज (LME): 29 जनवरी 2026 को तांबा 14,527.50 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।

घरेलू बाजार (MCX): भारत में भी जनवरी के दौरान तांबे की कीमतें ₹1,330 से ₹1,480 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई थीं।

कीमतें गिरने की मुख्य वजह: युद्ध और सुस्त आर्थिक विकास

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए सीधे संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: प्रतिष्ठित वैश्विक फर्म गोल्डमैन सैक्स ने तांबे के अपने मूल्य पूर्वानुमान को 12,850 डॉलर से घटाकर 12,650 डॉलर प्रति टन कर दिया है। उनका मानना है कि युद्ध के कारण वैश्विक आर्थिक विकास कमजोर होगा, जिससे औद्योगिक मांग में कमी आएगी।

आपूर्ति का खेल: हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तांबे की भौतिक आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है (क्योंकि ईरान तांबे का बड़ा उत्पादक नहीं है), लेकिन वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

क्या फिर से बनेगा नया रिकॉर्ड? विशेषज्ञों की राय

भविष्य की कीमतों को लेकर दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों में मतभेद है:

जेपी मॉर्गन और सिटीग्रुप: इन संस्थानों का मानना है कि तांबे की कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है। इसकी वजह यह है कि तांबे की खदानों (विशेषकर चिली और इंडोनेशिया में) में उत्पादन बाधाएं आ रही हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति सीमित हो सकती है।

बढ़ती मांग: इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तांबे की खपत लगातार बढ़ रही है। यदि आपूर्ति में थोड़ी भी कमी आई, तो कीमतें फिर से ₹1,500 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर सकती हैं।