भारत का कर्ज: क्या हमारा देश भी कर्ज लेता है? जानिए कितना है बोझ और कौन है दुनिया में हमारा सबसे बड़ा 'साहूकार'
India News Live,Digital Desk : अक्सर यह सवाल मन में आता है कि क्या भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को भी कर्ज लेने की जरूरत पड़ती है? इसका जवाब है— हाँ। दुनिया की लगभग हर बड़ी अर्थव्यवस्था, चाहे वह अमेरिका हो या चीन, विकास कार्यों के लिए कर्ज (Debt) लेती है। भारत भी अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (जैसे मेट्रो, हाईवे) और जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए कर्ज लेता है।
केंद्रीय बजट 2026-27 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल बकाया कर्ज लगभग ₹197.18 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। लेकिन घबराने की बात नहीं है, क्योंकि भारत के कर्ज लेने की रणनीति बहुत ही सुरक्षित और संतुलित है।
भारत का कर्ज: बाहरी कम, घरेलू ज्यादा
भारत के कर्ज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हमें विदेशों से बहुत कम पैसा उधार लेना पड़ता है।
घरेलू कर्ज (97%): भारत अपना लगभग 97% कर्ज अपने ही देश के स्रोतों (जैसे सरकारी बॉन्ड, बैंक और वित्तीय संस्थान) से लेता है।
विदेशी कर्ज (3%): हमारा बाहरी कर्ज केवल लगभग ₹6.74 लाख करोड़ है।
इसका फायदा यह है कि अगर वैश्विक बाजार में डॉलर की कीमत बढ़ती है या अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट आता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत कम असर पड़ता है। भारत का 'कर्ज-से-जीडीपी अनुपात' (Debt-to-GDP Ratio) लगभग 55.6% है, जिसे आर्थिक रूप से काफी स्थिर और सुरक्षित माना जाता है।
कौन सा देश है भारत का सबसे बड़ा 'साहूकार'?
अगर हम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को छोड़कर केवल देशों की बात करें, तो जापान भारत का सबसे बड़ा ऋणदाता (Lender) है।
जापान का कर्ज: भारत पर जापान का 23 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज बकाया है।
क्यों लेते हैं जापान से कर्ज? यह कर्ज मुख्य रूप से जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के जरिए मिलता है। जापान भारत को बहुत ही कम ब्याज दरों पर और लंबी अवधि के लिए कर्ज देता है। भारत की महत्वाकांक्षी 'बुलेट ट्रेन' परियोजना और कई मेट्रो प्रोजेक्ट्स में जापान का बड़ा योगदान है।
इन संस्थाओं से भी पैसा लेता है भारत
देशों के अलावा, भारत कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों से भी जुड़ा हुआ है:
विश्व बैंक (World Bank): यह भारत का सबसे बड़ा संस्थागत ऋणदाता है, जिसका बकाया लगभग 39.3 अरब डॉलर है।
एशियाई विकास बैंक (ADB): बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एडीबी भी भारत को बड़ी मदद देता है।
एनआरआई जमा: विदेशों में रहने वाले भारतीय (NRI) जो भारतीय बैंकों में पैसा जमा करते हैं, वह भी तकनीकी रूप से भारत की बाहरी देनदारियों (External Liabilities) का हिस्सा माना जाता है।