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May 12 2026 05:59 pm

'मनमाना और पक्षपाती': मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर क्यों भड़की TMC? सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले कानूनी और सियासी जंग तेज हो गई है। 4 मई को होने वाली मतगणना के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी एक विशेष निर्देश ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को नाराज कर दिया है। कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब ममता बनर्जी की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज (शनिवार) जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई करेगी।

विवाद की मुख्य वजह क्या है?

विवाद की जड़ में पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा 30 अप्रैल को जारी किया गया वह पत्र है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि:

प्रत्येक मतगणना टेबल पर कम से कम एक मतगणना पर्यवेक्षक (Observer) या सहायक, केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) का कर्मचारी होना चाहिए।

इसका अर्थ यह है कि मतगणना प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों की भूमिका को कम कर केंद्रीय कर्मियों की भागीदारी बढ़ाई गई है।

TMC के 3 प्रमुख तर्क: क्यों है विरोध?

1. 'निष्पक्षता पर खतरा और भाजपा का प्रभाव':

TMC का सबसे बड़ा तर्क यह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार है। चूंकि ये कर्मचारी केंद्र सरकार और PSU के अधीन आते हैं, इसलिए उन पर भाजपा का प्रशासनिक नियंत्रण है। पार्टी को डर है कि भाजपा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मतगणना प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

2. 'केवल बंगाल के साथ ही भेदभाव क्यों?':

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह नीतिगत बदलाव अचानक और केवल पश्चिम बंगाल के लिए ही किया गया है। TMC ने सवाल उठाया कि जिन अन्य राज्यों में साथ में चुनाव हुए, वहां ऐसी कोई व्यवस्था क्यों नहीं लागू की गई?

3. 'अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन':

पार्टी का कहना है कि अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी को चुनाव के बीच में इस तरह के बड़े नीतिगत बदलाव करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, मतगणना टेबल पर केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या असंतुलित रूप से बढ़ाने से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता खत्म हो जाएगी।

कलकत्ता हाई कोर्ट का क्या था रुख?

इससे पहले गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि:

निर्वाचन आयोग द्वारा मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में केंद्रीय कर्मियों की नियुक्ति करना गैरकानूनी नहीं है।

आयोग के पास स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए संसाधन तैनात करने का अधिकार है।

4 मई पर सबकी नजरें

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था। एग्जिट पोल के आंकड़ों में भारी अनिश्चितता के बीच, मतगणना की प्रक्रिया पर मचे इस विवाद ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला यह तय करेगा कि मतगणना टेबल पर कौन बैठेगा और क्या आयोग के निर्देशों में कोई बदलाव होगा।