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July 18 2026 06:58 am

गणेश जी की वह कहानी जो बताती है क्यों हैं वे विघ्नहर्ता

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India News Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा या धार्मिक कार्य की शुरुआत हमेशा गणेश जी से होती है। यही कारण है कि उन्हें ‘प्रथम पूज्य देवता’ कहा जाता है। गणेश जी को उनके स्वरूप और गुण के आधार पर कई नामों से जाना जाता है जैसे गजानन, एकदंत, लंबोदर, विनायक, गणपति और विघ्नहर्ता। हर नाम के पीछे एक खास अर्थ और कहानी छिपी होती है। आज हम आपको बताएंगे कि गणेश जी को विघ्नहर्ता क्यों कहा जाता है।

पौराणिक कथा क्या कहती है?

त्रिपुरा रहस्य ग्रंथ में त्रिपुरासुर के विनाश की कथा में गणेश जी का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, कामदेव नामक शक्तिशाली राक्षस की राख से भंडासुर नामक राक्षस उत्पन्न हुआ। इसे परास्त करने के लिए देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी ने अपनी शक्ति सेना बनाई।

भंडासुर की सेना में से एक राक्षस ने विघ्न यंत्र का निर्माण किया। यह यंत्र जहाँ भी स्थापित होता, वहाँ के लोगों और देवताओं की शक्तियाँ कमजोर हो जातीं। यंत्र को शक्ति सेना के मध्य में रख देने के कारण देवी ललिता की पूरी सेना अपने सामर्थ्य के साथ युद्ध नहीं कर पाई।

तभी प्रकट हुए गणेश जी, जिन्होंने तुरंत इस विघ्न यंत्र को नष्ट कर दिया। यही कारण है कि गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है – यानी, सभी विघ्नों और बाधाओं के नाशक।

विघ्नराज के रूप में गणेश जी

गणेश जी को विघ्नराज के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती की हंसी से ममासुर नामक राक्षस उत्पन्न हुआ। अपनी तपस्या और आसुरी शक्तियों से ममासुर ने देवताओं को बंदी बनाना शुरू कर दिया।

सभी देवता गणेश जी के पास मदद के लिए गए। गणेश जी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और विघ्नराज रूप में प्रकट होकर ममासुर का विनाश किया, सभी देवताओं को मुक्त कराया। तभी से उन्हें विघ्नहर्ता और विघ्नराज दोनों नामों से पूजनीय माना जाता है।

गणेश जी की यही महिमा है – वे न केवल हमारी आरंभिक प्रार्थनाओं के देवता हैं, बल्कि हर बाधा और कठिनाई को दूर करने वाले हैं।