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October 18 2026 11:07 am

जानिए महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन के रथ के जलने की रहस्यपूर्ण कहानी

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India News Live, Digital Desk : महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद भगवान कृष्ण ने अर्जुन को अपने रथ में बिठाया और एकांत स्थान की ओर ले गए। जैसे ही रथ वहां पहुँचा, कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वह नीचे उतर जाए। अर्जुन थोड़ा हैरान हुए, लेकिन उन्होंने कृष्ण की बात मान ली। जैसे ही अर्जुन रथ से उतरे, रथ अचानक भयंकर आग में जलने लगा।

हमने इस घटना के बारे में वृंदावन के ज्योतिषी राधाकांत वत्स से बात की, तो उन्होंने बताया कि इसका रहस्य महाभारत की गहन घटनाओं में छिपा है।

अर्जुन का रथ क्यों जल गया?

युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने अर्जुन के सारथी बनने का निर्णय लिया। युद्ध के दौरान, हनुमानजी को अर्जुन के रथ की रक्षा के लिए उसके ध्वजदंड पर बैठने को कहा गया। हनुमानजी ने 18 दिनों तक रथ की रक्षा की और उसके शीर्ष पर स्थिर रहे।

महाभारत युद्ध के समय, अर्जुन के रथ पर कर्ण, भीष्म और अन्य महान योद्धाओं ने कई शक्तिशाली और दिव्य अस्त्र चलाए। ये अस्त्र इतनी शक्ति रखते थे कि किसी भी वस्तु को तुरंत नष्ट कर सकते थे। लेकिन हनुमानजी की कृपा और भगवान कृष्ण की दिव्य उपस्थिति के कारण, रथ हर प्रहार को झेलता रहा। प्रत्येक प्रहार रथ को थोड़ा पीछे धकेल देता, लेकिन रथ को कोई क्षति नहीं पहुँचती थी।

जब युद्ध समाप्त हुआ और पांडव विजयी हुए, तब कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वह रथ से उतर जाए। अर्जुन ने उत्सुकता से पूछा, “क्यों?” कृष्ण ने केवल मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें नीचे उतरना चाहिए। जैसे ही अर्जुन रथ से उतरे और कृष्ण स्वयं रथ से उतर गए, रथ अचानक आग में जल गया और क्षणों में राख में बदल गया।

भगवान कृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि युद्ध के दौरान रथ पर आए सभी शक्तिशाली अस्त्रों की ऊर्जा रथ में समा गई थी। हनुमानजी और कृष्ण की दिव्य शक्ति के कारण यह ऊर्जा उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा रही थी। लेकिन अब, जब युद्ध समाप्त हो गया है और दोनों अपना कार्य पूरा कर चुके हैं, रथ में समाई यह ऊर्जा खतरनाक हो गई थी। इसलिए, रथ को जलाकर नष्ट करना आवश्यक था।

यह कथा हमें यह भी सिखाती है कि दिव्य शक्ति और संरक्षण के बिना, किसी भी साधन का अस्तित्व केवल अस्थायी होता है।