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October 18 2026 06:07 am

Secrets of Rudraksha सावन में शिवभक्त क्यों करते हैं इन दिव्य बीजों को धारण

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India News Live,Digital Desk : सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना का खास समय माना जाता है। इस पावन अवसर पर शिवभक्त व्रत, रुद्राभिषेक और रुद्राक्ष धारण कर भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं। मान्यता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुआ था, इसलिए यह उन्हें अत्यंत प्रिय है।

हर रुद्राक्ष में एक विशेष ऊर्जा होती है, जो न केवल मानसिक और शारीरिक समस्याओं को दूर करती है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और शांति भी लाती है। रुद्राक्ष 1 मुखी से लेकर 21 मुखी तक पाए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग 14 मुखी तक के रुद्राक्ष ही धारण करते हैं।

रुद्राक्ष के प्रकार और उनके चमत्कारी लाभ:

1 मुखी रुद्राक्ष: शिव का स्वरूप माना जाता है। मानसिक शांति, मोक्ष और नेत्र, हृदय व त्वचा रोगों में लाभकारी।

2 मुखी रुद्राक्ष: चंद्र दोष दूर करता है। हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क और गुर्दे से जुड़ी समस्याओं में सहायक।

3 मुखी रुद्राक्ष: मंगल दोष खत्म करता है। रक्त, कान, अंडकोष और गले की बीमारियों में फायदेमंद।

4 मुखी रुद्राक्ष: ब्रह्मा जी का प्रतीक। बुद्धि, मोक्ष और मानसिक रोगों में लाभ देता है।

5 मुखी रुद्राक्ष: सबसे सामान्य और प्रभावशाली। यश बढ़ाता है, पापों का नाश करता है और लिवर व हड्डी के रोगों से राहत देता है।

6 से 10 मुखी रुद्राक्ष और उनके लाभ:

6 मुखी: शुक्र दोष निवारण। नेत्र, यौन रोग, गला और मूत्र रोग में उपयोगी।

7 मुखी: शनि दोष शांत करता है। वैभव, आरोग्यता और नपुंसकता व नसों से जुड़े रोगों में राहत।

8 मुखी: राहु दोष हटाता है। चर्मरोग, श्वास और आंखों की समस्या में सहायक।

9 मुखी: मां दुर्गा का स्वरूप। केतु दोष दूर करता है। बुखार, फोड़े-फुंसी और पेट की बीमारियों में राहत।

10 मुखी: भगवान विष्णु का प्रतीक। नवग्रहों को शांत करता है, कीर्ति में वृद्धि करता है।

11 से 14 मुखी रुद्राक्ष की विशेषताएं:

11 मुखी: सभी ग्रह दोष से मुक्ति, हर कार्य में सफलता।

12 मुखी: कल्पवृक्ष जैसा फलदायी। दरिद्रता, पीड़ा और दुर्भाग्य से मुक्ति।

13 मुखी: दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाता है। रोगों से सुरक्षा और पापों से मुक्ति।

14 मुखी: शिव स्वरूप। पिशाच बाधाओं से रक्षा करता है और पापों को नष्ट करता है।