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September 11 2026 06:54 pm

नकली दवाओं के गोरखधंधे पर सरकार क्यों है खामोश? – रामजीलाल सुमन का बड़ा बयान

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India News Live,Digital Desk : समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने देश में बढ़ते नकली दवाओं के कारोबार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार में इस जानलेवा व्यापार को रोकने की मजबूत इच्छाशक्ति का अभाव है, जिसकी वजह से करोड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली दवाएं बेचने वाले व्यापारियों पर किसी तरह का मानसिक दबाव नहीं डाला जा रहा, जिससे ये कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।

दुनियाभर में 17 लाख करोड़ का धंधा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में नकली दवाओं का कारोबार 17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है। भारत इस अवैध व्यापार का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। हाल ही में महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने भी स्वीकार किया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नकली दवाएं दी जा रही हैं।

रामजीलाल सुमन का कहना है कि इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए हमारी न्यायिक प्रक्रिया बेहद कमजोर है और सरकार का रवैया भी नरम है। यही कारण है कि गुनहगार आसानी से बच निकलते हैं।

राज्यसभा में पूछे गए सवाल से खुला बड़ा राज

शनिवार को आगरा के संजय प्लेस स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता में सुमन ने बताया कि उन्होंने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि 2019 से 2025 के बीच 5,74,233 दवाओं के नमूने जांचे गए, जिनमें से केवल 16,839 ही गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरीं।

“दवा कंपनियों से भाजपा को मोटा चंदा”

सुमन ने आरोप लगाया कि बड़ी दवा कंपनियों ने भाजपा को भारी चंदा दिया है। टोरेंट फार्मा ने 61 करोड़, सिप्ला ने 37 करोड़, सन फार्मा ने 31 करोड़, जाइडस हेल्थकेयर ने 18 करोड़ और इंटास ने 20 करोड़ रुपये का चंदा भाजपा को दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि इन कंपनियों की दवाओं के नमूने असफल पाए जाने के बावजूद कोई कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

कानून के बावजूद कार्रवाई कमजोर

सुमन ने कहा कि पहले ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट-1940’ लागू था, जिसे संशोधित कर 2023 में नया प्रावधान लाया गया। अब नकली दवाएं बेचने पर 5 लाख रुपये जुर्माना और 3 साल की सजा का प्रावधान है।
लेकिन असलियत यह है कि अब तक सिर्फ 5.9% मामलों में ही दोषियों को सजा मिली है। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है और दंड प्रक्रिया की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।

गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़

सुमन ने कहा, “गरीब मरीज अपनी हैसियत से ज्यादा पैसे खर्च कर इलाज करवाता है, लेकिन जब नकली दवाओं से बीमारी ठीक नहीं होती, तो उसे जान गंवानी पड़ती है। इससे परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आर्थिक कर्ज और गुलामी में फंस जाता है। नकली दवा बेचने वाले देश के दुश्मन हैं, इन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।”

सरकारी संरक्षण का आरोप

आगरा में हाल ही में हुए नकली दवाओं के बड़े खुलासों का जिक्र करते हुए सुमन ने कहा, “इतने बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा बिना सरकारी संरक्षण के संभव ही नहीं। डेढ़ दर्जन ट्रेनों से नकली दवाओं की खेप उतरती है और कूरियर के माध्यम से भी दवाएं पहुंचाई जाती हैं। नामी कंपनियों के रैपर में नकली दवाएं बेची जा रही हैं, जबकि सरकार चुप है।”

औपचारिक कार्रवाई से नहीं होगा समाधान

सुमन ने चेतावनी दी कि अगर सिर्फ औपचारिक कार्रवाई कर मामले को दबा दिया गया, तो यह धंधा और बढ़ेगा। उन्होंने मांग की कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जिससे कोई भी कंपनी भविष्य में नकली दवा बनाने या बेचने की हिम्मत न कर सके।