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November 07 2026 06:18 am

पूजा घर में क्या-क्या होना चाहिए और क्या नहीं? जानिए देवी-देवताओं की कृपा पाने के अचूक नियम

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सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में घर के मंदिर यानी पूजा घर को सबसे पवित्र और ऊर्जावान स्थान माना गया है। घर का मंदिर केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं होता, बल्कि यह पूरे घर में सकारात्मक 'प्राण ऊर्जा' के संचार का मुख्य केंद्र होता है। मान्यता है कि यदि पूजा घर वास्तु सम्मत तरीके से व्यवस्थित हो, तो परिवार के सदस्यों पर ईश्वरीय कृपा बनी रहती है, मानसिक शांति मिलती है और आर्थिक समृद्धि के मार्ग खुलते हैं। इसके विपरीत, मंदिर में वास्तु नियमों की अनदेखी या अनुपयुक्त वस्तुओं का संग्रह घर में अशांति, तनाव और वास्तु दोष का कारण बन सकता है।

अक्सर लोग अपनी श्रद्धावश कई प्रकार की मूर्तियां, धार्मिक पुस्तकें और पूजन सामग्रियां मंदिर में रख लेते हैं, किंतु वास्तु के अनुसार मंदिर में हर वस्तु का अपना एक निश्चित महत्व और स्थान होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर में किन-किन चीजों का होना अनिवार्य और शुभ माना जाता है तथा किन्हें रखने से सख्त बचना चाहिए।

घर के मंदिर में अनिवार्य रूप से होनी चाहिए ये 7 पवित्र चीजें

1. गंगाजल या तांबे के पात्र में पवित्र जल वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में जल तत्व का होना अत्यंत आवश्यक है। पूजा घर में हमेशा तांबे या पीतल के लोटे में ताजा जल भरकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रखना चाहिए। इसमें गंगाजल की कुछ बूंदें और तुलसी का पत्ता अवश्य डालें। यह जल पूरे वातावरण को शुद्ध रखता है और नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करता है। पूजा के पश्चात इस अभिमंत्रित जल का छिड़काव पूरे घर में करना शुभ होता है।

2. मोरपंख और शंख (दक्षिणावर्ती शंख) घर के मंदिर में एक दक्षिणावर्ती शंख और मोरपंख रखना बहुत कल्याणकारी माना जाता है। शंख को मां लक्ष्मी का सहोदर भाई माना गया है। नियमित रूप से शंख की पूजा करने और उसकी ध्वनि करने से घर के सभी सूक्ष्म जीवाणु और नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं। वहीं, मोरपंख नकारात्मक दृष्टि दोष को दूर करता है और भगवान श्रीकृष्ण व मां सरस्वती की कृपा बनाए रखता है।

3. शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक दीपक को ज्ञान, प्रकाश और अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है। वास्तु के अनुसार, पूजा करते समय दीपक को भगवान के दाईं ओर (यानी आपके बाईं ओर) शुद्ध घी का और बाईं ओर (आपके दाईं ओर) तिल या सरसों के तेल का दीपक स्थापित करना चाहिए। दीपक की लौ हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होनी चाहिए, जिससे आयु, आरोग्य और धन में वृद्धि होती है।

4. घंटी (गरुड़ घंटी) मंदिर में रखी पीतल की छोटी गरुड़ घंटी की ध्वनि से निकलने वाली सकारात्मक तरंगे वातावरण को जाग्रत करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, घंटी बजाने से देवशक्तियां प्रसन्न होती हैं और आसुरी व नकारात्मक शक्तियां पलायन कर जाती हैं। घंटी को मंदिर के बाईं तरफ रखना उत्तम होता है।

5. गोमती चक्र और एकाक्षी नारियल धन और समृद्धि की स्थिरता के लिए पूजा घर में 11 गोमती चक्र और एक छोटा श्रीफल (एकाक्षी नारियल) लाल कपड़े पर स्थापित करना वास्तु सम्मत माना जाता है। यह मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को आकर्षित करने का अचूक साधन है, जिससे घर में कभी आर्थिक तंगी नहीं आती।

6. नियमित ताजी तुलसी दल और दूर्वा भगवान श्रीहरि विष्णु और लड्डू गोपाल की सेवा में तुलसी दल तथा भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए दूर्वा (दूब घास) का मंदिर में होना अत्यंत मंगलकारी है। ध्यान रहे कि बासी या सूखे हुए पत्ते मंदिर में न छोड़े जाएं; प्रतिदिन ताजे पत्ते ही अर्पित करें।

7. धूप, अगरबत्ती और चंदन प्राकृतिक धूप, गाय के गोबर के उपले पर गुग्गल-लोबान या शुद्ध चंदन का तिलक मंदिर में अवश्य होना चाहिए। चंदन शीतलता प्रदान करता है और इसकी सौम्य सुगंध घर के सदस्यों के मानसिक तनाव को शांत करती है।

मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियों से जुड़े जरूरी नियम

अंगूठे के बराबर हो विग्रह का आकार: गृहस्थ आश्रम में घर के मंदिर के भीतर रखी जाने वाली धातु या पत्थर की मूर्तियां अंगूठे के आकार (लगभग 3 से 4 इंच) से बड़ी नहीं होनी चाहिए। बड़ी मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा और कड़े तांत्रिक नियमों का पालन घर में संभव नहीं हो पाता।

एक ही भगवान की एक से अधिक मूर्ति न रखें: घर के मंदिर में भगवान गणेश, शिव जी या मां दुर्गा की दो या उससे अधिक मूर्तियां आमने-सामने या पास-पास न रखें।

शांत और सौम्य स्वरूप: हमेशा देवी-देवताओं के सौम्य, आशीर्वाद देते हुए और मुस्कुराते हुए स्वरूप की ही स्थापना करें। रौद्र रूप, युद्ध मुद्रा या खंडित प्रतिमाएं मंदिर में कभी न रखें।

शिवलिंग का नियम: यदि मंदिर में पारद या नर्मदेश्वर शिवलिंग रखते हैं, तो वह भी अंगूठे के पोर से बड़ा नहीं होना चाहिए और उन पर नियमित जलाभिषेक अनिवार्य है।

भूलकर भी मंदिर में न रखें ये चीजें

पूर्वजों और पितरों की तस्वीरें: कई लोग श्रद्धावश अपने दिवंगत माता-पिता या पूर्वजों की तस्वीरें मंदिर में भगवान के साथ लगा देते हैं। वास्तु के अनुसार यह एक गंभीर दोष है। पितरों का स्थान दक्षिण दिशा की दीवार पर होता है, उन्हें कभी भी देवस्थान में नहीं मिलाना चाहिए।

माचिस और बुझी हुई बत्तियां: दीपक जलाने के बाद जली हुई तीलियां, माचिस की डिब्बी या काली पड़ी हुई बत्तियां मंदिर के चबूतरे पर छोड़ना दरिद्रता को आमंत्रित करता है। इन्हें तुरंत किसी कचरा पात्र में डालें।

लोहा या नुकीली वस्तुएं: मंदिर में लोहे के चाकू, कैंची या धारदार औजार कभी न रखें।

सूखे हुए हार और मुरझाए फूल: पूजा के बाद चढ़ाए गए फूलों को उसी दिन या अगली सुबह हटा देना चाहिए। सूखे फूल घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

मंदिर की सही दिशा और ऊंचाई

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सबसे श्रेष्ठ और ऊर्जावान दिशा है। यदि किसी कारणवश ईशान कोण उपलब्ध न हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा में मंदिर स्थापित किया जा सकता है। दक्षिण दिशा में कभी भी मंदिर न बनाएं। इसके साथ ही मंदिर की ऊंचाई इतनी होनी चाहिए कि पूजा करते समय भगवान के चरण आपके हृदय स्थल के समानांतर रहें। मंदिर कभी भी जमीन पर सीधे न रखें और न ही इसे सीढ़ियों के नीचे, बेसमेंट में या शौचालय के बगल वाली दीवार से सटाकर बनाएं।