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September 23 2026 07:04 am

ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जा रहे F-35 स्टील्थ फाइटर के सीक्रेट पार्ट्स पहुंचे हॉन्गकॉन्ग, पेंटागन में मचा हड़कंप

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दुनिया के सबसे आधुनिक, घातक और महंगे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 लाइटनिंग II (F-35 Lightning II) से जुड़ा एक ऐसा सनसनीखेज सुरक्षा ब्लंडर सामने आया है, जिसने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के रक्षा तंत्र की नींद उड़ा दी है। ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना (RAAF) के F-35 लड़ाकू विमान के संवेदनशील और गुप्त पुर्जों (Components) को मरम्मत (Repairs) के लिए अमेरिका भेजा गया था। लेकिन प्रशांत महासागर पार करने के दौरान यह कार्गो शिपमेंट रहस्यमयी तरीके से डायवर्ट हो गया और सीधे चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हॉन्गकॉन्ग की जमीन पर जा पहुंचा। इस भारी चूक के बाद अमेरिकी रक्षा मुख्यालय 'पेंटागन' ने आपातकालीन जांच शुरू कर दी है और अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) की राष्ट्रीय सुरक्षा समितियों को ब्रीफिंग दी गई है। सबसे बड़ा डर यह सता रहा है कि क्या दुनिया की सबसे सीक्रेट रडार-इवेडिंग तकनीक अब चीनी सेना (PLA) के हाथों में पहुंच चुकी है?

प्रशांत महासागर के रास्ते ऑस्ट्रेलिया से हॉन्गकॉन्ग कैसे पहुंचा शिपमेंट?

अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'पॉलिटिको' (Politico) की विस्फोटक रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना हाल के महीनों में घटी। ऑस्ट्रेलिया अपनी वायुसेना में F-35A जेट्स का बेड़ा संचालित करता है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के पास F-35 के बुनियादी रखरखाव की सुविधाएं हैं, लेकिन विमान के कई अत्यधिक संवेदनशील और जटिल घटकों को रिपेयर करने के विशेष उपकरण वहां मौजूद नहीं हैं। इसी के तहत खराब हुए पुर्जों को F-35 की मूल निर्माता कंपनी 'लॉकहीड मार्टिन' (Lockheed Martin) के जरिए अमेरिका के रिपेयर डिपो भेजा जा रहा था।

F-35 का अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क काफी हद तक कमर्शियल फ्रेट शिपर्स और थर्ड-पार्टी मध्यस्थों (Intermediary Transporters) पर निर्भर रहता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर पार करते वक्त ट्रांसपोर्टर ने अज्ञात कारणों से रूट बदल दिया और यह संवेदनशील कार्गो सीधे हॉन्गकॉन्ग पोर्ट/एयरपोर्ट पर उतार दिया गया। पेंटागन के 'F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस' (JPO) ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि वे "अनसर्विसिएबल F-35 लाइटनिंग II कंपोनेंट्स के शिपमेंट से जुड़ी एक गंभीर समस्या" से अवगत हैं और उद्योग साझेदारों के साथ मिलकर इन पुर्जों की बरामदगी की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि शिपमेंट को जानबूझकर मोड़ा गया या यह एक भारी लॉजिस्टिकल भूल थी, और इस समय उन पार्ट्स पर किसका वास्तविक नियंत्रण है।

F-35 का 'कैनोपी' था शिपमेंट में, आखिर क्यों कांप रहा है अमेरिका?

जांच से जुड़े दो उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, हॉन्गकॉन्ग पहुंचे इस शिपमेंट में F-35 लड़ाकू विमान का कॉकपिट कैनोपी (Cockpit Canopy) शामिल था। आमतौर पर किसी विमान का कैनोपी केवल कॉकपिट को ढकने वाला पारदर्शी शीशा होता है, लेकिन पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों में यह तकनीक का सबसे बड़ा चमत्कार माना जाता है।

रडार-एब्जॉर्बेंट कोटिंग (RAM): F-35A के कैनोपी पर पारदर्शी 'रडार-एब्जॉर्बेंट मटेरियल' (RAM) की एक बेहद बारीक और गुप्त रासायनिक परत चढ़ाई जाती है। यही कोटिंग दुश्मन के ग्राउंड रडार और मिसाइल ट्रैकिंग सिग्नल्स को कॉकपिट के भीतर मौजूद पायलट और एवियोनिक्स से टकराकर वापस लौटने से रोकती है।

स्टील्थ की रीढ़: अगर कैनोपी की कोटिंग हट जाए या खराब हो जाए, तो F-35 रडार पर एक आम विमान की तरह दिखने लगता है।

तकनीक केवल खास सहयोगियों तक सीमित: यह रासायनिक और मैटेरियल साइंस फॉर्मूला दुनिया में सिर्फ अमेरिका और उसके गिने-चुने 'फाइव आइज' सहयोगियों के पास है।

क्या चीन के हाथ लग गई तकनीक? रिवर्स-इंजीनियरिंग का मंडराया खतरा

हॉन्गकॉन्ग साल 2020 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने के बाद से पूरी तरह बीजिंग के सीधे प्रशासनिक और खुफिया नियंत्रण में आ चुका है। ऐसे में अगर कोई संवेदनशील अमेरिकी सैन्य उपकरण हॉन्गकॉन्ग पहुंचता है, तो यह लगभग तय माना जाता है कि चीनी खुफिया एजेंसियों (MSS) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पास उसकी जानकारी पहुंच सकती है।

अमेरिकी कांग्रेस के पूर्व सैन्य विमानन विश्लेषक जे.जे. गर्टलर ने कहा कि चीन लंबे समय से साइबर जासूसी के जरिए F-35 का डेटा चुराने की कोशिश करता रहा है। 2009 में भी एक बड़े साइबर हमले में F-35 के डिजाइन संबंधी डेटा में सेंधमारी की खबरें आई थीं। लेकिन डिजिटल ब्लूप्रिंट होना और हाथ में असली फिजिकल पुर्जा (Physical Hardware) होना दो बिल्कुल अलग चीजें हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चीनी वैज्ञानिकों ने उस कैनोपी को अपनी आधुनिक लैब्स में ले जाकर उसका स्पेक्ट्रोस्कोपिक और रासायनिक परीक्षण कर लिया, तो वे उसकी कोटिंग की रिवर्स-इंजीनियरिंग कर सकते हैं। इससे न केवल चीन अपने स्टील्थ जेट्स (जैसे J-20 और J-35) को बेहतर बना सकता है, बल्कि अमेरिकी F-35 को आसानी से पकड़ने वाले नए एंटी-स्टील्थ रडार भी विकसित कर सकता है।

10 लाख पुर्जे पहले ही हो चुके हैं गायब, सप्लाई चेन पर बड़ा संकट

इस घटना ने 2 ट्रिलियन डॉलर (करीब 166 लाख करोड़ रुपये) के लाइफटाइम बजट वाले दुनिया के सबसे महंगे डिफेंस प्रोग्राम 'F-35' की लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अमेरिकी गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) की एक जांच रिपोर्ट में पहले ही यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि 5 साल के भीतर F-35 के 10 लाख से अधिक स्पेयर पार्ट्स (कीमत 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक) इन्वेंट्री से गायब हो चुके हैं। पेंटागन के पास इन सामानों का सीधा सरकारी ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता, क्योंकि रिकॉर्ड रखने का काम ठेकेदार कंपनी लॉकहीड मार्टिन के पास है।

हॉन्गकॉन्ग में फंसे इन पार्ट्स को वापस लाने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग और खुफिया एजेंसियां युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। लॉकहीड मार्टिन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए विस्तृत टिप्पणी से इनकार किया है, लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया है कि कमर्शियल फ्रेट कंपनियों के सहारे लड़ाकू विमानों के सीक्रेट पार्ट्स भेजना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।