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September 19 2026 10:21 pm

'कैदियों को बिरयानी मिल सकती है तो छात्रों को क्यों नहीं', CM विजय की ब्रेकफास्ट स्कीम में नॉन-वेज की तैयारी

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तमिलनाडु की स्कूली शिक्षा व्यवस्था और पोषण कार्यक्रमों में एक युगांतरकारी बदलाव की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राज्य की महत्वाकांक्षी 'पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम'  के अंतर्गत अब स्कूली छात्रों के नाश्ते के मेन्यू में पारंपरिक शाकाहारी विकल्पों के साथ-साथ चिकन बिरयानी जैसे पौष्टिक नॉन-वेज विकल्पों को जोड़ने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस संबंध में संकेत देते हुए तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने एक बेहद मुखर और संवेदनशील बयान देकर पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा है।

चेन्नई में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए शिक्षा मंत्री राजमोहन ने सीधे शब्दों में तर्क दिया कि जब सुधारात्मक उपायों के तहत जेलों में बंद कैदियों तक को नियमित रूप से चिकन बिरयानी जैसा पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है, तो फिर स्कूलों में पढ़ने वाले हमारे मासूम और होनहार बच्चे इस अधिकार से वंचित क्यों रहें? उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उच्च प्रोटीन और संतुलित पोषण की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने छात्रों को विविधतापूर्ण और स्वादिष्ट आहार देने के उद्देश्य से एक विशेष विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो मेन्यू में आवश्यक बदलावों की वैज्ञानिक समीक्षा करेगी।

पायलट प्रोजेक्ट और स्वच्छता के कड़े मानकों के बाद ही परोसी जाएगी बिरयानी, जल्दबाजी से परहेज

हालांकि शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूली बच्चों के लिए नॉन-वेज भोजन परोसने का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। यह सरकार का एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है, जिसे जमीनी स्तर पर उतारने से पहले व्यापक स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट्स और भोजन की स्वच्छता के कड़े परीक्षणों से गुजरना होगा। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से कोई समझौता न हो, इसके लिए मांस की गुणवत्ता, भंडारण, पकाने की तकनीक और वितरण प्रणाली के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी।

राजमोहन ने विस्तार से बताया कि स्कूली स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर नॉन-वेज खाना तैयार करने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित रसोइयों की जरूरत होगी। जब तक खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के सभी सुरक्षा और स्वच्छता पैमानों को शत-प्रतिशत प्रमाणित नहीं कर दिया जाता, तब तक इसे पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा। सरकार का ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को न केवल स्वादिष्ट बल्कि पूरी तरह स्वच्छ, बैक्टीरिया-मुक्त और ताजा भोजन ही थाली में मिले।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 22 सितंबर को करेंगे बड़ा विस्तार, 15 लाख से अधिक नए छात्रों को मिलेगा लाभ

इस बड़े नीतिगत विचार के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय आगामी मंगलवार, 22 सितंबर को पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम के दूसरे चरण का भव्य विस्तार करने जा रहे हैं। प्राथमिक कक्षाओं के बाद अब इस योजना के दायरे में राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के उच्च प्राथमिक स्तर के छात्रों को भी शामिल किया जाएगा। इस ऐतिहासिक विस्तार से राज्य भर के लगभग 15.30 लाख अतिरिक्त छात्र-छात्राएं प्रतिदिन सुबह गर्म और ताजा नाश्ते का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

इस विस्तार को वित्तीय रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 217.63 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया है, जिसके साथ ही इस पूरी नाश्ता योजना का वार्षिक बजट बढ़कर 724 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गया है। वर्तमान स्वीकृत मेन्यू के अनुसार, छात्रों को सप्ताह के अलग-अलग दिनों में उपमा, पौष्टिक खिचड़ी, सांभर के साथ पोंगल जैसे पारंपरिक सुपाच्य व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके साथ ही छात्रों के पोषण स्तर को बढ़ाने के लिए हफ्ते में कम से कम दो दिन बाजरा, रागी और ज्वार जैसे मोटे अनाजों (Millets) से बने विशेष खाद्य पदार्थ अनिवार्य रूप से दिए जा रहे हैं।

चेन्नई के सेंट्रलाइज्ड किचन से 447 स्कूलों में पहुंचेगा भोजन, तिरुवनमियूर से होगा अभियान का शंखनाद

राजधानी चेन्नई में इस विशाल परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन की कमान ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) को सौंपी गई है। नगर निगम अपने अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड और सेंट्रलाइज्ड किचन नेटवर्क के जरिए शहर के 447 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में गर्म नाश्ता पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। स्वचालित मशीनों से तैयार इस भोजन को थर्मल कंटेनरों में सुरक्षित रखकर स्कूल शुरू होने से आधा घंटा पहले तक कक्षाओं में पहुंचा दिया जाएगा।

आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 22 सितंबर को चेन्नई के तिरुवनमियूर स्थित एक ऐतिहासिक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर इस विस्तारित योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री स्वयं बच्चों के साथ बैठकर नाश्ता करेंगे और भोजन की गुणवत्ता का जायजा लेंगे। तमिलनाडु सरकार का मानना है कि सुबह का पौष्टिक नाश्ता मिलने से न केवल स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और ठहराव में भारी इजाफा होगा, बल्कि कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को जड़ से मिटाने में भी यह योजना पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल साबित होगी।