फिर छिड़ी जंग! अमेरिकी एयरबेस पर ईरान का ताबड़तोड़ मिसाइल हमला, बंदर अब्बास बना नया अखाड़ा

Post

India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरा गए हैं। अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में ईरान ने बड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित एक अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइलें दाग दी हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में शांति की बची-खुची उम्मीदों को गहरा झटका लगा है।

'जवाब का जवाब': एयरबेस पर हमला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के अनुसार, गुरुवार तड़के स्थानीय समयानुसार सुबह 5 बजे IRGC ने एक सक्रिय अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया। यह हमला अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के संवेदनशील 'बंदर अब्बास' हवाई अड्डे के पास किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। IRGC का स्पष्ट कहना है कि यह उनकी संप्रभुता पर हमले का सीधा पलटवार है।

क्यों जल रहा है बंदर अब्बास?

पिछले कुछ दिनों से बंदर अब्बास पोर्ट सिटी संघर्ष का नया केंद्र बन गई है। यह क्षेत्र ईरान की आर्थिक और सुरक्षा संबंधी 'लाइफलाइन' माना जाता है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस बंदरगाह का उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने और अमेरिकी जहाजों को धमकाने के लिए कर रहा है। इसी के चलते अमेरिकी नौसेना ने बंदर अब्बास में स्थित ईरानी ड्रोन कंट्रोल स्टेशनों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसने आग में घी डालने का काम किया है।

3 महीने से जारी है तनातनी

फरवरी 2026 से जारी इस संघर्ष में अस्थाई युद्धविराम के बावजूद स्थिति बार-बार विस्फोटक हो रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर संघर्षविराम (सीजफायर) के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि उन्होंने ईरान के उन ड्रोन्स को नष्ट किया है जो होर्मुज मार्ग के लिए खतरा बने हुए थे। वहीं, ईरान का कहना है कि अमेरिका शांति नहीं, बल्कि क्षेत्र पर नियंत्रण चाहता है।

ट्रंप की शर्तें और अधर में समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बयान में ईरान को 'आखिरी सांसें गिनने वाला' देश बताया था। ट्रंप ने वार्ता के लिए अपनी शर्तें सख्त कर दी हैं:

यूरेनियम समर्पण: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम स्टॉक उसे सौंप दे, जिसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है।

अब्राहम अकॉर्ड्स: अमेरिका दबाव बना रहा है कि क्षेत्र के मुस्लिम देश इजरायल के साथ शांति समझौते में शामिल हों।

शांति वार्ता की मेज पर बैठे दोनों देश अब परमाणु सामग्री और रणनीतिक नियंत्रण के पेच में बुरी तरह फंस गए हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जिस तरह से दोनों देश अब सक्रिय एयरबेस को निशाना बना रहे हैं, उससे यह युद्ध एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है।