ट्रंप की 'शांति' या महायुद्ध की तैयारी? अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया सीजफायर, पर ईरान को सता रहा 'धोखे' का डर
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट के युद्ध के मैदान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को उलझन में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध को रोकने के लिए 'सीजफायर' (संघर्षविराम) को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का एकतरफा ऐलान कर दिया है। ट्रंप का यह फैसला उनकी पुरानी धमकियों के बिल्कुल उलट है, जिससे ईरान की बेचैनी बढ़ गई है। तेहरान को शक है कि अमेरिका शांति के नाम पर केवल 'समय' निकाल रहा है ताकि वह एक बड़े और अचानक हमले की तैयारी कर सके।
धमकियों से पीछे हटे ट्रंप: पाकिस्तान की मध्यस्थता लाई रंग?
कल तक जो ट्रंप ईरान के हर पावर प्लांट को बम से उड़ाने की बात कर रहे थे, उन्होंने अचानक अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध पर लिया है। पाकिस्तान इस वक्त दोनों देशों के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शहबाज शरीफ ने ट्रंप के इस फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा।
एकतरफा फैसला और 'युद्ध जैसी' नाकाबंदी
भले ही ट्रंप ने बमबारी रोकने की बात कही है, लेकिन उन्होंने ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकाबंदी को हटाने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि यह 'सीजफायर' नहीं बल्कि 'नया हमला' है। ईरानी नेतृत्व के मुताबिक, बंदरगाहों को चारों तरफ से घेरकर व्यापार रोकना भी 'युद्ध का कृत्य' (Act of War) है। ट्रंप का तर्क है कि जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर उनके सामने घुटने नहीं टेक देता, तब तक यह नाकेबंदी जारी रहेगी।
ईरान का शक: 'अचानक हमले की साजिश'
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़ी एजेंसियों और प्रमुख वार्ताकार महदी मोहम्मदी ने ट्रंप की इस घोषणा को सिरे से खारिज कर दिया है। मोहम्मदी ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "ट्रंप द्वारा युद्धविराम बढ़ाना निश्चित रूप से एक अचानक हमले के लिए समय निकालने की चाल है। यह कोई शांति की पहल नहीं, बल्कि सैन्य आक्रामकता का ही हिस्सा है।" ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका की इस घेराबंदी को बलपूर्वक तोड़ने की ताकत रखता है।
होर्मुज पर ट्रंप का दावा: 'ईरान हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकता'
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर जारी विवाद पर ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान खुद चाहता है कि यह रास्ता खुला रहे क्योंकि इसी मार्ग से उनका तेल बिकता है और उनकी अर्थव्यवस्था चलती है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "ईरान हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकता। उन्हें अपने कच्चे तेल को बाजार तक पहुँचाने के लिए इस रास्ते की सख्त जरूरत है।" बता दें कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% इसी छोटे से समुद्री रास्ते से गुजरता है।
क्या रुक पाएगा महाविनाश?
28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर शुरू किए गए इस युद्ध ने अब तक हजारों जानें ले ली हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और यूएन प्रमुख की आलोचना के बाद ट्रंप के तेवर थोड़े ढीले जरूर पड़े हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों की कतारें और ईरान का अविश्वास इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही पटरी से उतर सकती है।